पद्यपंकज sandeshparak,बच्चों का खेल,बाल कविता खेल का मेला-कार्तिक कुमार

खेल का मेला-कार्तिक कुमार


Kartik Kumar

3:30 से खेला होगा,
बैट-बॉल का मेला होगा।
दूसरा और तीसरा का मैच,
नहीं करेंगे आपस में बैच।
मिल-जुलकर सब खेलेंगे,
छोटे बच्चे भी खेलेंगे।
सबके शिक्षक कार्तिक सर,
खेल में देंगे खूब हुनर।
बूढ़ा-बच्चा भी आएगा,
खेल-खेल में मन बहलाएगा।
बच्चों का सुंदर मेला होगा,
मौज-मस्ती का बेला होगा।
मनोरंजन सबको आएगा,
हँसते-हँसते खेल करेगा।
चार बजे फिर छुट्टी होगी,
खुशियों से हर आँखें होगी।
बारिश का मौसम साथ रहेगा,
कोई बच्चा नहीं घबराएगा।
सच्चा साथी बनकर आएगा,
बच्चों का सहयोग करेगा।
सुरक्षित घर पहुँचाएगा,
सबको हँसता-हँसता लाएगा।

मैदान में जब खेल सजेंगे,
नन्हे कदम भी खूब चलेंगे।
जीत-हार को भूल जाएँगे,
मिलकर खुशियाँ मनाएँगे।
अनुशासन का पाठ पढ़ेंगे,
खेल भावना से आगे बढ़ेंगे।
तालियाँ गूँजें चारों ओर,
खुशियाँ होंगी चहुँओर।
खेल से तन-मन स्वस्थ रहेगा,
हर बच्चा प्रसन्न रहेगा।
हँसी-खुशी दिन बीत जाएगा,
खेल का सुंदर रंग छाएगा।

कार्तिक कुमार
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्रतिभागी 2026
मध्य विद्यालय कटरमाला गोरौल वैशाली
7004318121

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