पद्यपंकज Bhawna,बाल कविता बचपन-बेबी अर्चना 

बचपन-बेबी अर्चना 



अनायास ही आज मुझे

स्मृत हो आया बचपन

नैनों से अश्रु छलक पड़े

कर याद वो सुनहरा क्षण

रोम-रोम हर्षित हुआ फिर

भाग-दौड़ की छोड़ घुटन

सच ! याद बहुत आता है बचपन 

वो बचपन में बारिश में

कागज की नाव चलाना

लड़ना-झगड़ना,

रूठना-मनाना

संग यारों के गप्पें लड़ाना

पल मे रोना फिर हँस पड़ना

पंख लगा उड़ गए कहाँ पल

रह गई बस जीवन की उलझन

सच! याद बहुत आता है बचपन!

हुई कूक कोयल की गायब

पीली सरसों अमराई गायब

सिमट गए हम खुद ही खुद में

भाग रहे हम गर्दभ-दौड़ में

कहाँ गए सावन के झूले

गुड्डे-गुड़िया चाट के ठेले

बाबा का कांधा माँ की लोरी

गुम हुए किस्सों के रेले

धमाचौकड़ी मस्त लड़कपन

सच! बहुत याद आता है बचपन!

चेहरे से मिट गई चिकनाई

आँखों के घेरे काली झाई

सिलवटें उभर आईं माथे पर

मन का शिशु करता है क्रंदन

चीख रहा अब मन का मोर

क्यों बीत गई वो अल्हड़ भोर

जिम्मेदारियों के बोझ तले

समझदारी का छद्म आवरण

सच! याद बहुत आता है बचपन!

प्यारा-सा रंगीला बचपन!

बेबी अर्चना 

मध्य विद्यालय कुआड़ी 

प्रखंड कुर्साकांटा जिला अररिया

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