बाल रस



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​              बाल रस

​सब देते बात-बात पे गच्चा मुझको ।
नहीं बनना पापा ताऊ चच्चा मुझको ।।
बेफ़िकरी का हँसता बचपन ही अच्छा ,
फिर से कोई बना दे बच्चा मुझको ।।

​खेल खिलौने मस्ती मेरी ।
ऊंट-पटंगा हस्ती मेरी ।।
कलम किताबें बस्ता मुझको ,
फिर से कोई बना दे बच्चा मुझको ।।

​माँ की लोरी , नींद सुहानी ।
मीठे सपने परियों की रानी ।।
बाल बलैयां मिट्ठी पुच्चा मुझको ,
फिर से कोई बना दे बच्चा मुझको ।।

​बिल्ली मौसी बन्दर मामा ।
खेल तमाशे सरकस जामा ।।
गली मोहल्ला सैर सपट्टा मुझको ,
फिर से कोई बना दे बच्चा मुझको ।।

​ज़िद पर अपनी तन जाऊँ मैं ।
पल में रूठूँ पल में मन जाऊँ मैं ।।
मीठा लगता घर का गुस्सा मुझको ,
फिर से कोई बना दे बच्चा मुझको ।।

​चरख झूलूँ, मेला जाऊँ ।
चाट, जलेबी, केला खाऊँ ।।
गुड़िया, गुल्लक, तमंचा मुझको ,
फिर से कोई बना दे बच्चा मुझको ।।

​बरसात में नहाऊँ छप्पक-छप्पक ।
काग़ज़ की नाव चलाऊँ लप्पक-लप्पक ।।
गिल्ली-डंडा, लंगड़ी, कंचा मुझको ,
फिर से कोई बना दे बच्चा मुझको ।।

​पपिया, पहिया, फिरकी, गुब्बारे ।
इंद्रधनुष, सूरज, चाँद-सितारे ।।
पतंग, माँझा, हुचका, झम्मा मुझको ,
फिर से कोई बना दे बच्चा मुझको ।।

तितली जुगनू पिल्ला मछली पकडूँ ।
हाथी घोड़ा बकरी बनती बदली पकडूँ ।।
टेसू- छुरछुर पिचकारी रक्खा मुझको ,
फिर से कोई बना दे बच्चा मुझको ।।

साया आँचल का टीका काजल का ।
जहाज बादल का लहजा पागल का ।।
नाज में बाइस्कोप का डिब्बा मुझको ,
फिर से कोई बना दे बच्चा मुझको ।।

हर आदमी को टेंशन की बीमारी ।
कभी हँसे ना खेले दुनिया दारी ।।
ग्वाल बाल जीवन अच्छा मुझको ,
फिर से कोई बना दे बच्चा मुझको ।।

उल्लू – ऊँट -टट्टू-गधा – बन्दर ।
उपनाम हमारे कितने सुन्दर ।।
काला अक्षर भैंस बराबर कहते चच्चा मुझको ,
फिर से कोई बना दे बच्चा मुझको ।।

मेरी ही परछाई दिखाते मुझको ।
फ़िर हउआ बोल डराते मुझको ।।
चुपाते , देकर चीजों का किच्चा मुझको ,
फिर से कोई बना दे बच्चा मुझको ।।

उंगली पकड़ , कंधे चढ़ सैर करूँ मैं ।
अच्छी चीजें देखूँ , लेने की जैर करूँ मैं ।।
अच्छा लगता धूप छाँव का रस्ता मुझको ,
फिर से कोई बना दे बच्चा मुझको ।।

तन से ना सही मन से अच्छे बन जाओ ।
मेरे संग प्यारे तुम भी बच्चे बन जाओ ।।
घोड़ी बन पीठ बिठाएं चच्चा मुझको ,
फिर से कोई बना दे बच्चा मुझको ।।

लेखक- कमल ‘कमाल’

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कमल 'कमाल'

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