होनहार

  • *होनहार*
  • विद्यालय की घंटी अब सुबह-सुबह पुकारती है,
  • नींद भरी आँखों में भी नई राह सँवारती है।
  • बिस्तर से उठते ही मन में एक बेचैनी छाई है,

  • पढ़ने की चाहत ने हर सुस्ती को हराई है।
  • दादी जो रोज सवेरे मुस्काकर हमें जगाती थीं,
  • आज चुपचाप बिस्तर पर ही उनींदी-सी सो जाती हैं।
  • लगता है तबीयत कुछ ठीक नहीं, शायद बुखार आया है,
  • दिल घबराता है, मन में चिंता का बादल छाया है।
  • कोई बात नहीं, आज बिना खाए ही स्कूल जाएंगे,
  • नहीं नहीं खाली पेट अच्छा नहीं फिर भी l
  • दादी को जरा-सी भी तकलीफ नहीं पहुंचाएंगे।
  • उनकी दुआओं को अपना सहारा बनाएंगे,
  • हर मुश्किल राह को हँसकर पार लगाएंगे।
  • पढ़-लिखकर होशियार बन, उनके सपनों को सजाएंगे,
  • गरीबी की हर बेड़ी को हम मिलकर तोड़ गिराएंगे।
  • होनहार हैं हम, मेहनत से कभी न घबराएंगे,
  • हर कठिनाई को अपने हौसले से हराएंगे।
  • गाँव और समाज का जो ऋण हम पर चढ़ा हुआ है,
  • ज्ञान और सेवा से उसे भी हम चुकाएंगे ।
  • योग्य बनकर हर दिल में सेवा का दीप जलाएंगे,
  • अपने कर्मों से इस जीवन को सार्थक बनाएंगे।
  • होनहार हैं हम,
  • कड़ी मेहनत को ही अपना धर्म बनाएंगे।
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RAVIKESH KUMAR

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