हिंदी, सुर वाणी की जाया- किशोर छंद सुर वाणी की जाया कहिए, हिंदी को। भूल रहे सब क्यों है गहिए,[...]
Day: September 9, 2025
दूर तक चलते हुए – शिल्पीदूर तक चलते हुए – शिल्पी
घर की ओर लौटता आदमी होता नहीं कभी खाली हाथ हथेलियों की लकीरों संग लौटती हैं अक्सर उसके अभिलाषाएं, उम्मीद,[...]
हिंदी : हमारी अस्मिता – अविनाश कुमारहिंदी : हमारी अस्मिता – अविनाश कुमार
हिन्द देश के हिंदी हैं हम, हिंदी से है पहचान हमारी। रक्त बहे या लहू बहे, बस हिंदी है अस्मिता[...]
मेरी हिंदी तू मेरे मौन को आवाज़ देती है। – रीतु वाजपेयीमेरी हिंदी तू मेरे मौन को आवाज़ देती है। – रीतु वाजपेयी
तू मेरी मौन पीड़ा में, मेरी आवाज़ बनती है, पोंछकर अश्रु, सरल शब्दों से दुलार करती है। तेरे अस्तित्व[...]
हिंदी मेरी भाषाहिंदी मेरी भाषा
“हिंदी मेरी भाषा ” हिंदी मेरी भाषा है, हिन्दी मेरी आशा है। हिंदी का उत्थान करना, यही मेरी जिज्ञासा[...]
अँखियाँ भिगोने से- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’अँखियाँ भिगोने से- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
मनहरण घनाक्षरी छंद कड़ी धूप खिलने से- परेशानी बढ़ जाती, मौसम बदल जाता, बरसात होने से। मजदूर किसानों की- मेहनत[...]
