Author: Anupama Priyadarshini

सादा भोजन -नीतू रानीसादा भोजन -नीतू रानी

0 Comments 9:13 pm

खाना आलू,भात खाना न ज्यादा, ये होगा मोटापा को फायदा। तेल ,मसाला ज्यादा न खाना, पेट दर्द होकर होगा पाखाना।[...]

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Jainendra Prasad Ravi

बच्चों का हुडदंग – जैनेन्द्र प्रसाद रविबच्चों का हुडदंग – जैनेन्द्र प्रसाद रवि

0 Comments 9:11 pm

जब भी दीवाली आता, बच्चों को बहुत भाता, भाग दौड़ कर निज, घरों को सजाते हैं। साफ कर घर-वार रंगाई[...]

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Manu Raman Chetna

वो दीपक हैं मैं बाती – मनु रमण चेतनावो दीपक हैं मैं बाती – मनु रमण चेतना

0 Comments 9:17 pm

सदा सुहागन का वर मांगू, हे प्रभु विनती कर तुमसे। रखना सलामत मेरे पिया को,भक्ति करूं तेरी तन मन से।[...]

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नारी सबपर हो भारी – -नीतू रानीनारी सबपर हो भारी – -नीतू रानी

0 Comments 9:15 pm

विषय -कमजोर कहाँ हो तुम नारी। नारी कमजोर कहाँ हो तुम नारी, हर क्षेत्र में सबपर हो भारी। तेरे साथ[...]

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Jainendra Prasad Ravi

इंसान की कीमत – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’इंसान की कीमत – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 9:13 pm

आदमी से कहीं ज्यादा पशु होता वफादार, मानव को त्याग हम, पालते हैं स्वान को। माता-पिता से भी ज्यादा करते[...]

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Jainendra Prasad Ravi

सुबह की सैर – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’सुबह की सैर – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 9:11 pm

शीतल पवन चली, दूब बिछी मखमली, सुंदर नजारा देख,कदम ठहरता। फैली हुई हरियाली, झुकी हुई धान बाली, फसलों को देखकर[...]

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Snehlata

जीवन दीप जलाना सीखें – स्नेहलता द्विवेदीजीवन दीप जलाना सीखें – स्नेहलता द्विवेदी

0 Comments 7:04 pm

हम सब प्रेम पुजारी मिलकर, जीवन दीप जलाना सीखें। जग में फैले अंधकार को, कर्म रश्मि नहलाना सीखें। अपना घर[...]

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S K punam

रूपघनाक्षरी – एस.के.पूनमरूपघनाक्षरी – एस.के.पूनम

0 Comments 7:00 pm

भानु खड़ा द्वार पर, घूँघट उठाती निशा, शीत का आगाज हुआ,ओढ़ ले कंबल आज। सुबह पत्तियाँ करे, तुहिन से श्रृंगार[...]

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Nitu Rani

करवाचौथ गीत – नीतू रानी “निवेदिताकरवाचौथ गीत – नीतू रानी “निवेदिता

0 Comments 6:50 pm

पिया यौ अहाॅ॑ लएअ करै छी करवाचौथ त्योहार यौ , भैर दिन राएख केअ उपवास यौ ना। एक दिन पहिले[...]

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Ranjeet Kushwaha

प्रेम-दीप – रणजीत कुशवाहाप्रेम-दीप – रणजीत कुशवाहा

0 Comments 9:14 pm

चलो प्रेम के दीप जलाएं। भेदभाव को दूर भगाएं। मानव में क्यों द्वेष आज है। खंडित होता क्यों समाज है।[...]

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