Author: Anupama Priyadarshini

Sanjay Kumar

रावण-एक अपराजित योद्धा – संजय कुमाररावण-एक अपराजित योद्धा – संजय कुमार

0 Comments 8:31 pm

उसे घमंड था कि,मैं हूँ अपराजेय हूँ त्रिलोक विजेता। दिग,दिगंत है हमारी मुट्ठी में, पर भूल रहा था वो। अपराजित[...]

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S K punam

विजयादशमी राज – एस.के.पूनमविजयादशमी राज – एस.के.पूनम

0 Comments 8:05 pm

🙏कृष्णाय नमः🙏 विधा:-रूपघनाक्षरी (विजयादशमी राज) दस दिन श्रमदान, चहुँओर मिला मान, सम्मान का अधिकार,पाकर करता नाज। सत्ता पाने का संघर्ष,[...]

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S K punam

मुक्तहस्त स्नान दान – एस.के.पूनममुक्तहस्त स्नान दान – एस.के.पूनम

0 Comments 8:03 pm

🙏कृष्णाय नमः🙏 विधा:-रूपघनाक्षरी विषय:-(मुक्तहस्त स्नान दान) बीता है ग्रहणकाल, सुतक का अंत हुआ, सरिता के तट पर,करते हैं योगी ध्यान।[...]

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S K punam

देवी को स्वीकार है – एस.के.पूनम।देवी को स्वीकार है – एस.के.पूनम।

0 Comments 10:38 am

🙏कृष्णाय नमः🙏 विधा:-मनहरण घनाक्षरी। सप्तमी को पट खुले, उपासक झूम उठे, अष्टमी को पंड़ालों में,भक्तों की कतार है। नर-नारी ध्यान[...]

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Nitu Rani

मन लगता है – नीतू रानीमन लगता है – नीतू रानी

0 Comments 10:36 am

नमन मंच 🙏🙏🙏 विषय -नवरात्रि आती है मन लगता है शीर्षक -मन लगता है। नवरात्रि आती है मन लगता है,[...]

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Sanjay Kumar

सिद्धिदात्री – संजय कुमारसिद्धिदात्री – संजय कुमार

0 Comments 10:33 am

हे सिद्धिदात्री,हे मातृशक्ति करता रहूं मैं,अविरल भक्ति। तिमिर अज्ञानता को नष्ट करो सद्बुद्धि,सद्भाव ज्ञान भरो। इतनी सी माँ दया करो[...]

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Jainendra

जगत निर्माता – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’जगत निर्माता – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 10:31 am

अगर कपूर धूप कंचन के थाल धर, आरती उतारें रोज गणेश की माता की। फल-फूल-अक्षत ले चरणों में सिर रख,[...]

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S K punam

मनहरण घनाक्षरी – एस.के.पूनममनहरण घनाक्षरी – एस.के.पूनम

0 Comments 10:30 am

🙏कृष्णाय नमः🙏 विधा:-मनहरण घनाक्षरी पूनम की निशा काल, स्वर्णिम है मेरा हाल, रवि दिखा प्राची दिशा,चमकता माथ है। पक्षी करे[...]

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Nitu Rani

छागर की माॅ॑ – नीतू रानी” निवेदिता”छागर की माॅ॑ – नीतू रानी” निवेदिता”

0 Comments 10:27 am

छागर की माॅ॑ बकरी कहती है क्या यहीं है नवरात्रि का त्योहार, जिस त्योहार में की जाती है मेरे आगे[...]

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Jainendra

ममतामई माता – जैनेन्द्र प्रसाद रविममतामई माता – जैनेन्द्र प्रसाद रवि

0 Comments 10:25 am

जननी जगत त्राता ममतामई हैं माता, पूजन भजन कर, पाते हैं आशीष लोग। शरण में जो भी आता मन चाहा[...]

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