अब ये दुनियाँ -दुनियाँ न रहा, सिहर उठता हूँ इस दुनियाँ को देखकर। इस दुनियाँ में हो रहे चोरी डकैती[...]
Author: Anupama Priyadarshini
दहेज रूपी दानव – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’दहेज रूपी दानव – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
देश से विदेश तक, धरती अम्बर तक, सभी जगह बेटियां , छोड़ रही आज छाप। बेटियों को बेटा मान,लालन पालन[...]
दहेज – एस.के.पूनमदहेज – एस.के.पूनम
नन्ही परी आज आई, घर में खुशियां लाई, आँगन में किलकारी,गूंज रही सरेआम। नूतन विचारों संग, छू ली आसमानी रंग,[...]
दोहा – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’दोहा – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’
रिश्ता हो कायम सदा, भरते रहें मिठास। अपनेपन का भाव रख, करिए सुखद उजास।। ईश-याचना नित करें, रखें न कपट[...]
दोहा – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’दोहा – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’
भूप जनक के बाग में, आए राजकुमार। दिव्य मनोहर वृक्ष से, मुग्ध नयन अभिसार।। नव किसलय नव पुष्प से, हर्षित[...]
रुपघनाक्षरी – एस.के.पूनमरुपघनाक्षरी – एस.के.पूनम
सरयू के तट पर, सीताराम बैठ कर, मांझी की प्रतीक्षा कर,भक्तों का बढ़ाये मान। थाल में निर्मल जल, दृगों से[...]
मनहरण घनाक्षरी – एस.के.पूनममनहरण घनाक्षरी – एस.के.पूनम
रुपहली आभा संग, लिए हुए लाल रंग, उदित है प्रभाकर,प्रवेश उजास का । हर्षित हो वसुंधरा, इठलाते झूमे भौंरा, हरियाली[...]
मुंह का निवाला – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’मुंह का निवाला – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
मुंह का निवाला गरीबों को दुनिया में, सिर पर छत नहीं, हमेशा अभाव में ही कटता जीवन है। थक जाती[...]
विशुद्ध हो सटता – एस.के.पूनमविशुद्ध हो सटता – एस.के.पूनम
🙏कृष्णाय नमः🙏 विधा:-मनहरण (विशुद्ध हो सटता) घर-बार छोड़ कर, करते हैं योग ध्यान, बिछा हुआ भ्रम जाल,काटे नहीं कटता। आदान-प्रदान[...]
करती हूँ बंदगी – एस.के.पूनमकरती हूँ बंदगी – एस.के.पूनम
🙏कृष्णाय नमः🙏 विधा:-मनहरण (करती हूँ बंदगी) तरसती है निगाहें, भरती हैं नित्य आहें, भूखे पेट तड़पती,मजबूर जिन्दगी। भाग्य से निवाला[...]
