Author: Anupama Priyadarshini

S K punam

मन कहे वाह वाह – एस.के.पूनममन कहे वाह वाह – एस.के.पूनम

0 Comments 10:32 am

🙏कृष्णाय नमः🙏 विधा:-रूपघनाक्षरी (मन कहे वाह वाह) हरी-भरी घास पर, ओश करे जगमग, प्रकृति की छटा देख,मन कहे वाह-वाह। रवि[...]

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Kumkum

कर्मनिष्ठ – कुमकुम कुमारी “काव्याकृति”कर्मनिष्ठ – कुमकुम कुमारी “काव्याकृति”

0 Comments 10:31 am

जिन्हें विश्वास हो खुद पर, सदा आगे वो बढ़ जाते। करते कर्म की पूजा,कर्मयोगी वो कहलाते। नहीं करते शिकवा वो,नहीं[...]

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S K punam

उपदेश देते हैं – एस.के.पूनमउपदेश देते हैं – एस.के.पूनम

0 Comments 10:28 am

🙏कृष्णाय नमः🙏 विधा:-मनहरण विषय:-उपदेश देते हैं बाल कृष्ण सखा संग, बन कर गुरु अंग, रहकर कुटिया में,गुरुमंत्र लेते हैं। बैठे[...]

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Nitu Rani

वटसावित्री – नीतू रानीवटसावित्री – नीतू रानी

0 Comments 11:12 pm

हे बहिना पिया लय केलौं वटसावित्री त्योहार हे, खायके अरबा फलाहार हे ना। हे बहिना——-२। पिया संग गेलौं हम बाज़ार[...]

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Ratna Priya

वट-सावित्री पर्व – रत्ना प्रियावट-सावित्री पर्व – रत्ना प्रिया

0 Comments 11:05 pm

संस्कृति है यह भारत की, विवाह के आदर्श का | वट-सावित्री पर्व है, दांपत्य के उत्कर्ष का || अश्वपति की[...]

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Jainendra

मौसम बहार के – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’मौसम बहार के – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 11:03 pm

दूर रख शिकवे गिले, आपस में मिलें गले, झूमती हैं आनंद में, गांव की ये गलियाँ। चल रही पुरवाई, खिल[...]

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Nitu Rani

माँ और मायका – नीतू रानीमाँ और मायका – नीतू रानी

0 Comments 4:40 am

माँ से मायका पिता से सम्मान, ये दोनों के नहीं रहने से अपमान हीं अपमान। माँ है तो मायके के[...]

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Jainendra

पुष्प अमलतास के – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’पुष्प अमलतास के – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 4:38 am

पत्तियां है हरी-हरी, वृक्ष लगे जैसे परी, पेड़ों में झूमते ये -पुष्प अमलतास के। खुब जब मिले प्यार, हंसता है[...]

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Jainendra

परिवार – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’परिवार – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 4:37 am

मनहरण घनाक्षरी छंद (विश्व परिवार दिवस पर) दुख में किनारा देता, जीने का सहारा होता, हरेक गम का साथी, होता[...]

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Manu Raman Chetna

मेरी तन्हाई – मनु रमण चेतनामेरी तन्हाई – मनु रमण चेतना

0 Comments 4:36 am

रोजमर्रा की जिन्दगी में भागदौड़, परेशानी,थकावटें तनाव और बहुत सारी उलझनें इन उलझनों में सिमटकर रह जाती है जिंदगी पर[...]

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