Author: Anupama Priyadarshini

Nitu Rani

वटसावित्री – नीतू रानीवटसावित्री – नीतू रानी

0 Comments 11:12 pm

हे बहिना पिया लय केलौं वटसावित्री त्योहार हे, खायके अरबा फलाहार हे ना। हे बहिना——-२। पिया संग गेलौं हम बाज़ार[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Ratna Priya

वट-सावित्री पर्व – रत्ना प्रियावट-सावित्री पर्व – रत्ना प्रिया

0 Comments 11:05 pm

संस्कृति है यह भारत की, विवाह के आदर्श का | वट-सावित्री पर्व है, दांपत्य के उत्कर्ष का || अश्वपति की[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Jainendra

मौसम बहार के – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’मौसम बहार के – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 11:03 pm

दूर रख शिकवे गिले, आपस में मिलें गले, झूमती हैं आनंद में, गांव की ये गलियाँ। चल रही पुरवाई, खिल[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Nitu Rani

माँ और मायका – नीतू रानीमाँ और मायका – नीतू रानी

0 Comments 4:40 am

माँ से मायका पिता से सम्मान, ये दोनों के नहीं रहने से अपमान हीं अपमान। माँ है तो मायके के[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Jainendra

पुष्प अमलतास के – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’पुष्प अमलतास के – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 4:38 am

पत्तियां है हरी-हरी, वृक्ष लगे जैसे परी, पेड़ों में झूमते ये -पुष्प अमलतास के। खुब जब मिले प्यार, हंसता है[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Jainendra

परिवार – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’परिवार – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 4:37 am

मनहरण घनाक्षरी छंद (विश्व परिवार दिवस पर) दुख में किनारा देता, जीने का सहारा होता, हरेक गम का साथी, होता[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Manu Raman Chetna

मेरी तन्हाई – मनु रमण चेतनामेरी तन्हाई – मनु रमण चेतना

0 Comments 4:36 am

रोजमर्रा की जिन्दगी में भागदौड़, परेशानी,थकावटें तनाव और बहुत सारी उलझनें इन उलझनों में सिमटकर रह जाती है जिंदगी पर[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Devkant

कुंडलिया- देव कांत मिश्र ‘दिव्य’कुंडलिया- देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 6:15 pm

माता की आराधना, करो सदा प्रणिपात। अंतर्मन के भाव में, भरो नहीं आघात।। भरो नहीं आघात, कर्म को सुंदर करना।[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
S K punam

माँ को निहारता है- एस.के.पूनममाँ को निहारता है- एस.के.पूनम

0 Comments 9:54 pm

दुग्ध की प्रथम धार, माता का असीम प्यार, बाल क्षुधा तृप्त हुआ,माँ को निहारता है। आँचल पकड़ कर, धीरे-धीरे चल[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Jainendra

माँ – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’माँ – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 9:51 pm

निज कर्म से इंसान, बनाता है पहचान, पिता तो पालक होते, जन्म देती माता है। बच्चों को देती संस्कार, सिखाती[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें