Author: madhukumari

Ram Kishore Pathak

सर्दी- कहमुकरी- राम किशोर पाठक सर्दी- कहमुकरी- राम किशोर पाठक 

0 Comments 4:18 pm

सर्दी – कहमुकरी स्पर्श सदा कंपित है करती। रोम-रोम में सिहरन भरती।। जैसे वह हमसे बेदर्दी। क्या सखि? साजन! न[...]

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बलहीनन का बस पीड़ हरो-रामपाल प्रसाद सिंहअनजान बलहीनन का बस पीड़ हरो-रामपाल प्रसाद सिंहअनजान 

0 Comments 4:12 pm

हम जान रहे कर क्या सकते, तुम तो न मुझे इनकार करो। शुभ कर्म किए शुभ धर्म किए,मम श्वेत मकान[...]

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Ram Kishore Pathak

भोलेनाथ हमारे – राम किशोर पाठकभोलेनाथ हमारे – राम किशोर पाठक

0 Comments 9:08 pm

भोलेनाथ हमारे । तेरे भक्त पुकारे ।। आएँ हैं सब द्वारे । तू ही कष्ट उबारे।। आओ हे त्रिपुरारी। नैना[...]

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Ram Kishore Pathak

किसान – राम किशोर पाठककिसान – राम किशोर पाठक

0 Comments 11:56 am

खेतों का है रंग सुनहरा। जैसे सोना रहता बिखरा।। फसल धान की है खेतों में। श्रम का प्रतिफल है रेतों[...]

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Jainendra

गाँधी की दरकार है – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’गाँधी की दरकार है – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

0 Comments 10:19 pm

भारत की चुनावों में  धन की है बोलबाला, पैसे से ही आज यहांँ, होती जीत- हार है। अधिकांश लोग एक [...]

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Ram Kishore Pathak

जाति-वर्ण लोकतंत्र पर भारी – राम किशोर पाठक जाति-वर्ण लोकतंत्र पर भारी – राम किशोर पाठक 

0 Comments 10:19 pm

है लोकतंत्र की महिमा न्यारी। चलती जिससे संविधान प्यारी।। सबने बदली अब दुनियादारी। लूट रहे धन कहकर सरकारी।। लेकर सारे[...]

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Ram Kishore Pathak

शब्दों का संसार-राम किशोर पाठकशब्दों का संसार-राम किशोर पाठक

0 Comments 5:44 pm

शब्दों का संसार (१६-१४) शब्दों का संसार अनोखा, होंठ चूमता है रहता। कुछ बसते हैं संग रगो में, कुछ को[...]

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Ram Kishor Pathak

रामायण – राम किशोर पाठक रामायण – राम किशोर पाठक 

0 Comments 10:08 pm

आओ चिंतन कर लें थोड़ा, जो खुद गढ़ते हैं। गाथा सुंदर रामायण की, हम-सब पढ़ते हैं।। नारायण होकर जब नर[...]

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यूँ ही लम्हें बीत  जाएँगे – अमरनाथ त्रिवेदीयूँ ही लम्हें बीत  जाएँगे – अमरनाथ त्रिवेदी

0 Comments 10:04 pm

यूँ ही लम्हें बीत  जाएँगे , न हम रहेंगे न तुम रहोगे  फिर अपनी बात   कहाँ  और किसको कहोगे ? यह अंतहीन  सिलसिला [...]

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