कहता हूं, व्यक्ति अपने संस्कार का ही होता है गुलाम, सुसंस्कारवश अच्छा काम करता, कुसंस्कार से बुरा काम, अच्छा संस्कार[...]
Author: madhukumari
मुझको कान्हा आज बनाओ -राम किशोर पाठकमुझको कान्हा आज बनाओ -राम किशोर पाठक
अम्मा कुछ मुझको बतलाओ। मुझको कान्हा आज बनाओ। जो चाहूँ वह दे दो मुझको। ऐसे कभी नहीं तड़पाओ।। मैं भी[...]
ग्रामीण परिवेश-जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’ग्रामीण परिवेश-जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
सुबह सवेरे जाग, कबूतर और काग, धूप सेकने को बैठी, पक्षियांँ मुंडेर पर। फसलें खेतों से जब किसानों के घर[...]
बाल कविता – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’बाल कविता – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
होकर मगन गगन के नीचे, दौड़ रहे ये बच्चे हैं। जिन्हें देखकर वयोवृद्ध सब,अंतर मन से नच्चे हैं।। हरियाली के[...]
काम का महत्व-जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’काम का महत्व-जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
सीखाते कुरान-गीता, गुरुजन माता-पिता, हमें ये जीवन नहीं, मिला है आराम को। मजदूर किसानों को मिलता विश्राम नहीं, सुबह सबेरे[...]
लेखनी-एस.के.पूनमलेखनी-एस.के.पूनम
सोच रही है लेखनी, कहाँ से प्रारंभ करुँ, फँस गया विचारों में,हो न जाए परिहास। तूलिका भी डर रही, कागज[...]
बिरसा मुंडा की जयंती-रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’बिरसा मुंडा की जयंती-रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
आजादी आधार, मिली जब से भारत को। दौड़ पड़े सबलोग,विनत हुए सु-स्वागत को।। सुनकर विस्मित मान,रहे हैं खुद को प्राणी।[...]
फिर क्यों करती है माँ हल्ला-राम किशोर पाठकफिर क्यों करती है माँ हल्ला-राम किशोर पाठक
कहती अम्मा मुझको लल्ला। फिर क्यों करती है माँ हल्ला।। कान्हा थें कितना ही नटखट। माखन मिसरी खाते चटपट।। घूमा[...]
रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
बोल अरे क ख या ग घ,घोल मिठापन डाल रही है। बैठ गई जब सम्मुख माॅं तब,बालक ज्ञान प्रक्षाल रही[...]
आओ हे बनवारी- राम किशोर पाठक आओ हे बनवारी- राम किशोर पाठक
आओ हे बनवारी- गीत हरने कष्ट हमारी। आओ हे बनवारी।। मेरा धर्म बचाना। करना नहीं बहाना।। आस रखी दुखियारी। आओ[...]
