प्रेरणा – मधुर ध्वनि छंद मुक्तक
गहें प्रेरणा, उर संवेदना, सबसे प्यारी।
हर्षित रहिए, सुख-दुख सहिए, बन व्रत धारी।।
उत्तम सबसे, लेना जग से, कर्म सही है,
खुद में उत्तम, मैं सर्वोत्तम, विस्मयकारी।।०१।।
बनो प्रेरणा, भरो चेतना, सुंदर सबमें।
हाथ बढ़ाना, गले लगाना, हर-पल जग में।।
मिले सहारा, अगर तुम्हारा, जग आगे हो,
कदम बढ़ाओ, आगे आओ, खाकर कसमें।।०२।।
कर्म निरंतर, छूता अंतर, भरो प्रेरणा।
हो सुखकारी, दुनिया सारी, करो प्रेक्षणा।।
भेद मिटाओ, समता लाओ, सब अपने हैं,
अधिक त्यागकर, रहे जागकर, सिमित एषणा।।०३।।
रचनाकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
सियारामपुर, पालीगंज, पटना, बिहार।
संपर्क – ९८३५२३२९७८

