🙏ऊँ कृष्णाय नमः🙏
विधा:-मनहरण घनाक्षरी
विषय:-(नवतपा)
आग बरसाते रवि,
बढ़ रहे तापमान,
तपती है धरातल,मुरझाया फूल है।
चहुँओर वनराई,
अनगिनत काटे हैं,
अब कहाँ छाँह मिले,मानव की भूल है।
बीत जाए माह ज्येष्ठ,
चाहते हैं जन-जन,
नव तपा में सूरज,भी चुभाते शूल हैं।
नदियाँ है सूखी सारी,
चेतना को खोते लोग,
पवन का गर्म झोंका,आच्छादित धूल है
एस.के.पूनम(सेवानिवृत्त शिक्षक)
फुलवारी शरीफ, पटना।

