पद्यपंकज Bihar Divas बिहार हूं मैं”-अर्जुन केशरी 

बिहार हूं मैं”-अर्जुन केशरी 



“छठ पूजा का ठेकुआ हूं, स्वाद से भरपूर 

लिट्टी चोखा आचार हूं मैं 

शिक्षक नवाचार हूं मैं 

अजी हां बिहार हूं मैं !!

“चाणक्य की नीति हूं , आर्यभट्ट का आविष्कार हूं मैं।

महावीर की तपस्या हूं , बुद्ध का अवतार हूं मैं। अजी हां ! बिहार हूं मैं।

सीता की भूमि हू, विद्यापति का संसार हूं मैं।

जनक की नगरी हूं, मां गंगा का श्रंगार हूं मैं।। अजी हां ! बिहार हूं मैं।

चंद्रगुप्त का साहस हूं, अशोक की तलवार हूं मैं।

बिंदुसार का शासन हूं , मगध का आकार हूं मैं। अजी हां ! बिहार हूं मैं।

दिनकर की कविता हूं, रेणु का सार हूं मैं।

नालंदा का ज्ञान हूं, पर्वत मन्दार हूं मैं।

अजी हां ! बिहार हूं मैं।

वाल्मिकी की रामायण हूं, मिथिला का संस्कार हूं मैं।

पाणिनी का व्याकरण हूं, ज्ञान का भण्डार हूं मैं।। अजी हां ! बिहार हूं मैं।

राजेन्द्र का सपना हूं, गांधी की हुंकार हूं मैं।

गोविंद सिंह का तेज हूं, कुंवर सिंह की ललकार हूं मैं।। अजी हां ! बिहार हूं मैं।

अर्जुन केशरी 

प्रधान शिक्षक 

प्राथमिक विद्यालय मिर्धाचक आदिवासी टोला 

कहलगांव, भागलपुर

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