Category: छंद

हरिगीतिका- रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’हरिगीतिका- रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’

0 Comments 10:26 pm

नवरात्रि में माॅं अन्नपूर्णा, रोहिणी कहलाइए। तू सात्त्विकी कल्याणकारी, चंडिका बन आइए।। काली त्रिमूर्ति महेश्वरी भव, भद्रकाली नाम हैं। आराधना[...]

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विधाता छंद: एस. के.पूनमविधाता छंद: एस. के.पूनम

0 Comments 7:39 pm

  चरण छूलूँ भवानी माँ, पनाहों में मुझे पाओ। महादेवी जगतजननी, मुझे तो छोड़ मत जाओ। सदा तुम कष्ट ही[...]

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दोहावली – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’दोहावली – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 10:18 pm

  दो अक्टूबर जन्म है, दो पुरुषों के नाम। गाँधी प्यारा एक है, दूजा लाल ललाम।। गाँधी जी का जन्म[...]

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विधाता छंद- एस. के. पूनमविधाता छंद- एस. के. पूनम

0 Comments 9:28 am

  कहे गोविंद श्यामा से, मिलूँगा मैं अकेले में। कही राधा अनंता से, पडूँगी ना झमेले में। सदा से ही[...]

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मनहरण घनाक्षरी- रामपाल प्रसाद सिंहमनहरण घनाक्षरी- रामपाल प्रसाद सिंह

0 Comments 6:58 am

उपदेश देकर जो, जिंदगी सवार लेते, बेचकर निज कर्म, सहज बनाते हैं। दुनिया को कहे फिर, ,बेकार हैं मोती हीरे,[...]

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गीत- रामपाल प्रसाद सिंहगीत- रामपाल प्रसाद सिंह

0 Comments 8:47 pm

आज जयंती है दिनकर की, अपनी रचना लिखकर गाओ। जिसने लिखकर समय को मोड़ा, उनकी रचना सुनो सुनाओ।। विषम काल[...]

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विधाता छंद – एस. के. पूनमविधाता छंद – एस. के. पूनम

0 Comments 7:40 pm

सहज हिंदी सरल भाषा, धरातल भी दिवाना है। कहीं बिंदी कहीं नुक्ता, जमाना भी पुराना है। चलीं कलमें जगी आशा,[...]

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दोहावली – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’दोहावली – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 7:22 pm

हिंदी अमरतरंगिनी, जन-जन की है आस। सच्चे उर जो मानते, रहती उनके पास।। हिंदी भाषा है मधुर, देती सौम्य मिठास।[...]

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मनहरण घनाक्षरी- रामपाल प्रसाद सिंहमनहरण घनाक्षरी- रामपाल प्रसाद सिंह

0 Comments 5:40 pm

भाद्रपद शुक्लपक्ष, धन्य हे सुलक्ष्य लक्ष, वक्रतुंड महाकाय, चरण पखारते। कोमल- कोमल दूर्वा, मोदकम मोतीचूर्वा, मूषक वाहन बीच, लाल ही[...]

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Devkant

दोहावली – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’दोहावली – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 9:27 pm

दिव्य पर्व जन्माष्टमी, प्रकट हुए घनश्याम। गले सुशोभित हार में, लगते हैं अभिराम।। भाद्र पक्ष की अष्टमी, मथुरा कारावास। कृष्ण[...]

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