मातृ-भक्ति का मुझे मिला, जो प्रसाद नौनिहाल का, नूतन दिवस है मेरी प्रतिकृति के दसवें साल का। नन्हीं कली का[...]
Category: प्रेम
प्रेम दिव्य अनुभूति परम है- देव कांत मिश्र ‘दिव्य’प्रेम दिव्य अनुभूति परम है- देव कांत मिश्र ‘दिव्य’
प्रेम दिव्य अनुभूति परम है आओ हम विश्वास बढ़ाएँ। प्रेम मग्न हों प्रभु को भजकर, अंतर्मन नव भाव जगाएँ। प्रेम[...]
पिता – शांति कुमारीपिता – शांति कुमारी
एक उम्मीद है एक आस हैं पिता परिवार की हिम्मत और विश्वास है पिता बाहर से सख्त अंदर से नर्म[...]
मां – अंजली कुमारीमां – अंजली कुमारी
पृथ्वी पर जीवन का अंकुर फूटा, धरा पर हरियाली छाई है । हर जीव जगत का वंश बढ़ाने, स्त्रीत्व चरम[...]
मुखौटा-मुखौटा-
सुंदर मुखौटा लिए चेहरे पर, ईमानदारी का रंग चढ़ाया था। ईमान बेच कर उपदेश दे रहे, गीता का कसम खाया[...]
विदाई की बेला-सुरेश कुमार गौरवविदाई की बेला-सुरेश कुमार गौरव
काल चक्र के समय काल को, विदा करने की भी ठानी गई चंद सेकेंड,मिनट, घंटे,पहर को, सबके द्वारा मानी भी[...]
मित्रता की सार्थकता-सुरेश कुमार गौरवमित्रता की सार्थकता-सुरेश कुमार गौरव
जब जीवन में मिलते हैं सच्चे और अच्छे मित्र मन मस्तिष्क में उभरते हैं सार्थक जीवन चित्र! मित्र है वह[...]
प्रेम-अमरनाथ त्रिवेदीप्रेम-अमरनाथ त्रिवेदी
प्रेम प्रेम से बड़े न दूजो आन । प्रेम से बड़े न दूजो आन ।। प्रेम जहाँ फलता – फूलता[...]
राधाकृष्ण से सीताराम बनना है प्रेम- राजेश कुमार सिंहराधाकृष्ण से सीताराम बनना है प्रेम- राजेश कुमार सिंह
वह प्रेम है ही नहीं जिसका उद्देश्य शरीर को पाना है। हर युग में प्रेम का मतलब राधा-कृष्ण बन जाना[...]
माँ-जैनेन्द्र प्रसाद रवि’माँ-जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
सभी देवियों से बढ़कर माँ ऊंचा है तेरा दर्जा, नहीं उतार पाऊंगा कभी जीवन भर मैं तेरा कर्जा। पहली बार[...]
