Category: बच्चों का खेल

Dharmendra Kumar Thakur

बच्चों की शरारत – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरबच्चों की शरारत – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

0 Comments 7:39 pm

सुबह सवेरे बजती घंटी, खुल जाते विद्यालय के द्वार, मानो टूट पड़ा हो धरती पर, नन्हें वीरों का संसार। लाखों[...]

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Kartik Kumar

खेल का मेला-कार्तिक कुमारखेल का मेला-कार्तिक कुमार

0 Comments 5:02 pm

3:30 से खेला होगा, बैट-बॉल का मेला होगा। दूसरा और तीसरा का मैच, नहीं करेंगे आपस में बैच। मिल-जुलकर सब[...]

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बच्चों का खेल – जैनेन्द्र प्रसाद रविबच्चों का खेल – जैनेन्द्र प्रसाद रवि

0 Comments 10:41 am

मोबाईल का युग आया,बच्चे बूढे को मन भाया,आज भी गांँवों में बच्चे, खेलते अनेक खेल। कभी पानी में नाव चलाते,कभी[...]

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