आमोद हारी मुरारी- सर्वगामी/ अग्र सवैया छंद – राम किशोर पाठक

आमोद हारी मुरारी- सर्वगामी/ अग्र सवैया छंद – राम किशोर पाठक     आमोद हारी मुरारी सुनो भक्त का, भक्त तेरा तुझे ही पुकारा। राधा बिहारी धरूँ ध्यान तेरी सदा,…

मन:स्थिति

मन:स्थिति मन चंचल है द्रुतगामी है, अकल्पनीय है इसकी स्थिति, कभी व्यथित कभी विचलित, अबूझ है इसकी स्थिति, कभी आत्मकेंद्रित, कभी पराश्रित, अबोधगम्य है इसकी स्थिति, कभी किंकर्तव्यविमूढ, कभी स्वावलंबी,…

शरद पूर्णिमा – गिरीन्द्र मोहन झा

शरद पूर्णिमा की रात सुहावन, है अति मनभावन, चंद्रमा की चांदनी, उजाला, शीतलता, है अति पावन, चंद्रदेव अमृत-वृष्टि हैं कर रहे, माँ लक्ष्मी का पूजन-अर्चन, कुलदेवी को प्रणाम निवेदित, पान-मखान…

जीवन सुंदर सरस – महामंगला छंद गीत, राम किशोर पाठक

जीवन सुंदर सरस, लगता हरपल खास। कर्म करे जो सतत, होता नहीं उदास।। हारा मन कब सफल, मन के जीते जीत। जो लेता है समझ, बदले जग की रीत।। जीत…

वक्त पूछता है, गिरीन्द्र मोहन झा

वक्त पूछता है रात्रि में शयन से पूर्व वक्त पूछता है, आज तुमने क्या-क्या अर्थपूर्ण किया, सुबह होती है जब, वक्त पूछता है, प्रिय ! आज तुम्हें करना है क्या-क्या,…

बादल, आशीष अम्बर

  छोटी-छोटी बूँदें लाएँ, ये मतवाले बादल, श्वेत-स्लेटी, नीले-पीले, भूरे-काले बादल। कैसे-कैसे रूप बदलते, करते जादू-मंतर, हाथी जैसे कभी मचलते, गरजन करें निरंतर। इधर-उधर घोड़ों-से दौड़े, चाबुक वाले बादल, छोटी-छोटी…

मनहर कृष्ण- महामंगला छंद, राम किशोर पाठक

अंजन धारे सतत, कृष्ण कन्हाई नैन। देख लिया जो अगर, कैसे पाए चैन।। मूरत मनहर सुघर, मिले न कोई और। बिना गिराए पलक, देखूँ करके गौर।। श्याम सलोने सुघर, रखें…

संशय में कृष्ण- महामंगला छंद- राम किशोर पाठक

कृष्ण कन्हैया अगर, आते मिलने आज। होते विस्मित मगर, देख सभी के काज। माखन मिसरी सहज, उनको देता कौन। दुनिया दारी समझ, रहे न कोई मौन।। राधा जैसी सहज, मिलते…