Category: Bhawna

ashish amber

बादल, आशीष अम्बरबादल, आशीष अम्बर

0 Comments 9:12 pm

  छोटी-छोटी बूँदें लाएँ, ये मतवाले बादल, श्वेत-स्लेटी, नीले-पीले, भूरे-काले बादल। कैसे-कैसे रूप बदलते, करते जादू-मंतर, हाथी जैसे कभी मचलते,[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Girindra Mohan Jha

भाई तुम उन्हीं को देना वोट, गिरीन्द्र मोहन झाभाई तुम उन्हीं को देना वोट, गिरीन्द्र मोहन झा

0 Comments 8:49 pm

भाई तुम उन्हीं को देना वोट, भाइयों, बहनों तुम अवश्य करना वोट, उन्हीं को देना वोट, जो करे विकास की[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Ram Kishor Pathak

शरद पूर्णिमा – महामंगला छंद, राम किशोर पाठकशरद पूर्णिमा – महामंगला छंद, राम किशोर पाठक

0 Comments 8:44 pm

देखो आया शुभद, आज कई संयोग। रजनी लगती नवल, चकवा का हठयोग।। पूनम सुंदर धवल, लेकर आयी रूप। आज पूर्णिमा[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Nitu Rani

कोजगराक गीत नीतू रानी “निवेदिता”कोजगराक गीत नीतू रानी “निवेदिता”

0 Comments 8:36 pm

लक्ष्मी पूजा एवं कोजगरा की हार्दिक शुभकामनाएँ आप सबों को। विषय-गीत शीर्षक-कोजगरा। तर्ज-सावन का महीना पवन करे शोर। कोजगराक गीत[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

चाचा का कोजगरा – अवधेश कुमारचाचा का कोजगरा – अवधेश कुमार

0 Comments 8:11 am

चाचा का कोजगरा : –शरद पूर्णिमा की चाँदनी छम-छम बरसे,आँगन हो उजियार,खुशियों की झिलमिल करती, उल्लास भरे त्यौहार।माँ के थाल[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Ram Kishor Pathak

मैं कैसे हार मान लूंँ – राम किशोर पाठकमैं कैसे हार मान लूंँ – राम किशोर पाठक

0 Comments 11:22 am

मैं कैसे हार मान लूँ- गीत (अंतरराष्ट्रीय शिक्षक दिवस पर ) आओ नयी पहचान लूँमैं कैसे हार मान लूँ। शिक्षक[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

एक ही ईश्वर की संतान – जैनेन्द्र प्रसाद रविएक ही ईश्वर की संतान – जैनेन्द्र प्रसाद रवि

0 Comments 11:18 am

(मनहरण घनाक्षरी छंद में) भाग-१सभी लोग खाते अन्न,एक जैसा होता तन,एक ही तो जल पीते, हिंदू मुसलमां हैं। सभी स्वांस[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

बाल प्रेरक व्यक्तित्व – राष्ट्रपिता गांधी जी एवं शास्त्री जी – अवधेश कुमारबाल प्रेरक व्यक्तित्व – राष्ट्रपिता गांधी जी एवं शास्त्री जी – अवधेश कुमार

0 Comments 11:07 am

बाल प्रेरक व्यक्तित्व : राष्ट्रपिता गाँधी जी और शास्त्री जीचरखा वाले बापू प्यारे,सत्य-अहिंसा की राह दिखाए।सादगी जिसने सिखलाई,सबको प्रेम-भाव अपनाए।[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

रघुनंदन का है शिकार- रामपाल प्रसाद सिंह अनजानरघुनंदन का है शिकार- रामपाल प्रसाद सिंह अनजान

0 Comments 10:59 am

पद्धरी छंदसम -मात्रिक छंद, 16 मात्राएँआरंभ द्विकल से,पदांत Slअनिवार्य रघुनंदन का है शिकार। हर दिशा निशा लो गईं जाग।सबके होंठों[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

आलू रे आलू तेरा रंग कैसा – नीतू रानीआलू रे आलू तेरा रंग कैसा – नीतू रानी

0 Comments 10:31 pm

आलू रे आलू तेरा रंग कैसाजिस सब्जी में मिला दूँ लगे उस जैसाआलू रे आलू ———-२। आलू की चटनी बहुत[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें