धनाक्षरी छंद सेना हमारे देश की,आन,बान व शान है,सेवा समर्पण ही इनकी पहचान है। देश रहे सुरक्षित,अखंड और अटूट,इनमें ही इनका अपना स्वाभिमान है। गर्व होता इनपर,देश और समाज को,हमें…
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बोलता समय – राम किशोर पाठक
बोलता समय- दोहा छंद गीत शोर शराबा तो सदा, खौलाता है रक्त।अधर जहाँ पर मौन हो, वहाँ बोलता वक्त।। अगर प्रकट करते नहीं, मन के अपने भाव।ध्यान रखें इतना मगर,…
मौसम – राम किशोर पाठक
मौसम – रास छंद गीत२२२२,२२२२,२११२ मौसम भाए, ऋतुपति आए, प्रीत गहे।खुशी मनाते, सब इठलाते, झूम रहे।। कुसुम खिले हैं, गंध मिले हैं, होश हरे।मीत बुलाए, प्रीत जगाए, जोश भरे।।संग गंध…
अनुकरण से सीखना – मनु कुमारी
अनुकरण से सीखना बोलने से पहले बच्चे,आँखों से पढ़ना सीखते हैं।कहने से पहले दुनिया को,करके देखना सीखते हैं। जो देखा, वही सीखा उसने,जो पाया, वही अपनाया।जीवन की पहली पाठशाला,अनुकरण ने…
जातिवाद तो कोढ़ है – राम किशोर पाठक
जातिवाद तो कोढ़ है- दोहा छंद गीत बना दिया शासन जिसे, लाइलाज सा रोग।जातिवाद तो कोढ़ है, कहते ज्ञानी लोग।। जाति पूछते रोज हैं, नियम बद्ध हर रोज।फिर कहते यह…
ऋतुओं का स्कूल – आशीष अंबर
पोस्टमैन है सूरज चाचा,डाक सुबह की लाता है ।द्वारा – द्वार किरणों की पाती ,ठीक समय पहुँचाता है । चुन – चुन करती चिड़िया रानी,चुगती दाना, पीती पानी ।गीत सुनाती…
श्रम की महिमा – आशीष अंबर
श्रम से हर मंजिल होती आसान,श्रम से ही तो मानव बनें महान । श्रम से जो भी है नाता रखता,जीवन – पथ पर वह कभी न थकता । श्रम से…
मां भारती के साधक – मनु कुमारी
माँ भारती का साधक : माखनलाल चतुर्वेदी कलम नहीं थी उनकी केवल,ज्वाला थी अंगार बनी।शब्दों में राष्ट्र धड़कता था,भारत माँ साकार बनी।। न भय लिखा, न दास्यता,न झुकी कभी उनकी…
मैं संविधान हूं – आंचल शरण
“मैं संविधान हूं” मैं भारत का संविधान हूं,महज़ एक किताब नहीं,गहन करो तो अधिकार हूंमैं भारत का संविधान हूं।इसमें केवल शब्द नहींभारतीयों की तकदीर हूंमैं भारत का संविधान हूं।करता हूं…
गीत गाते सभी हैं-राम किशोर पाठक
झूमो गाओ, मिल-जुल सभी, प्रीत पाते सभी हैं। आओ प्यारे, जय-जय करें, गीत गाते सभी हैं।। आजादी है, समरस रहें, देश का तंत्र न्यारा। रंगों में है, घुल मिल…