मन का चुनाव (राम या रावण)- उमेश कुमार सिन्हा मन में उठते दो विकल्प हैं—एक सद्गुण, एक दुर्गुण छाया, मनुष्य[...]
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विश्वास और घाव – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरविश्वास और घाव – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
विश्वास और घाव – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर कमी किसी ने भी नहीं छोड़ी, हमें आजमाने में, शेष कुछ न रहा[...]
मन का रावण कब मारोगे?- धीरज कुमारमन का रावण कब मारोगे?- धीरज कुमार
वो रावण था, क्योंकि वसुधा को शापित कर अधिकार किया। गंधर्व, यक्ष पर क्या कहना, देवों पर अत्याचार किया। वो[...]
स्वयं की खोज – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरस्वयं की खोज – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
स्वयं की खोज – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर जो मैं कभी था ही नहीं… कभी क्षमा नहीं करूँगा मैं उन चेहरों[...]
सागर का संदेश – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरसागर का संदेश – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
सागर का संदेश – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर अथाह मन का मीत यहाँ पर, यह जग सारा खारा है, सीने में[...]
नाम कहो या संज्ञा – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरनाम कहो या संज्ञा – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
नाम कहो या संज्ञा – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर संज्ञा (Noun) परिभाषा काव्य: जो बतलाए नाम को, वस्तु, जीव या स्थान।[...]
मातृशक्ति – बेबी अर्चनामातृशक्ति – बेबी अर्चना
मातृशक्ति – बेबी अर्चना हे मातृशक्ति अब जाग भी जाओ, कर निज-अस्तित्व की तू पहचान। बन सबला कर निज पथ-[...]
मनु के दोहे – मनु कुमारीमनु के दोहे – मनु कुमारी
मनु के दोहे – मनु कुमारी दुर्गा है जगतारिणी, जग उनकी संतान। चाहो तुम उद्धार तो, कर माता का ध्यान।।[...]
अटल विश्वास – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरअटल विश्वास – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
अटल विश्वास – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर टूटे हैं स्वप्न कई, पर आँखों में अभी अंगार बाकी है, हालात के बंधनों[...]
नारी : सम्मान या आडंबर? – एंजल कुमारीनारी : सम्मान या आडंबर? – एंजल कुमारी
नारी : सम्मान या आडंबर? – एंजल कुमारी मंदिर में पूजे देवी को, बाहर डालते कुदृष्टि, क्यों करते नारी का[...]
