Category: Bhawna

ram किशोर

शिवरात्रि है – राम किशोर पाठकशिवरात्रि है – राम किशोर पाठक

0 Comments 1:17 pm

छंद – घनाक्षरी शिव शंकर की भक्ति, श्रद्धा भाव यथाशक्ति, मिटाती यह आसक्ति, बनें दया-पात्र हैं। मनाएँ हर माह में,[...]

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माँ – अश्मजा प्रियदर्शिनीमाँ – अश्मजा प्रियदर्शिनी

0 Comments 5:22 pm

भू-तल पर जन-जीवन की तुम आशा हो। माँ तुम चराचर जगत की परिभाषा हो। तुम हीं लक्ष्मी, सरस्वती, तुमसे जीवन[...]

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Amarnath Trivedi

संसार के असली मर्म – अमरनाथ त्रिवेदीसंसार के असली मर्म – अमरनाथ त्रिवेदी

0 Comments 9:06 pm

कोई  भी कुछ कह  ले सुन ले , इस दुनिया में कोई नहीं रह पाया है । जो इस  मृत्यु[...]

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बड़ा कठिन है रे मन -अवनीश कुमारबड़ा कठिन है रे मन -अवनीश कुमार

0 Comments 8:31 pm

(श्रुतिकीर्ति की अंतरवेदना) बड़ा कठिन है रे मन! राजरानी बनकर अवध में रहना, और राजर्षि पति शत्रुघ्न का भ्रातृधर्म निभाने[...]

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सुन री दीया – अवनीश कुमारसुन री दीया – अवनीश कुमार

0 Comments 8:29 pm

सुन री दीया काश! तू सुन पाती, मेरी विरह-व्यथा समझ पाती। तेरी जलती लौ से, क्या-क्या अनुमान लगाऊं? मद्धिम पड़ती[...]

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चित्रधारित सृजन – नीतू रानीचित्रधारित सृजन – नीतू रानी

0 Comments 8:10 pm

जल से भरकर पात्र को रखना निशदिन भाय, आएगी चिड़िया पानी पीने जाएगी प्यास बुझाय। पीती है पानी चिड़िया हृदय[...]

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पिता – गिरीन्द्र मोहन झापिता – गिरीन्द्र मोहन झा

0 Comments 6:46 pm

परमपिता परमेश्वर हैं, हम सब उनके संतान, उन्हीं की अनुकम्पा से, हम सब सदा क्रियमाण । सबसे पहले परमपिता परमात्मा[...]

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आम आदमी का अंदाज – हरिपद छंद – राम किशोर पाठकआम आदमी का अंदाज – हरिपद छंद – राम किशोर पाठक

0 Comments 10:27 pm

आम आदमी का अंदाज – हरिपद छंद आज आदमी आम हो गया, नहीं रहा कुछ खास। बदल रहे अंदाज सभी[...]

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जीवन-यात्रा – गिरीन्द्र मोहन झाजीवन-यात्रा – गिरीन्द्र मोहन झा

0 Comments 9:45 pm

करना है, करते ही जाना है, बढ़ना है, बढ़ते ही जाना है, जब है सूर्य का तुममें वास, कोई अंधेरा[...]

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