बहरहाल अर्ध हूँ मैं मेरे शून्य का कुछ प्रतिशत मृत्यु के द्वार पर है खड़ा शेष बाट जोह रहा इसके[...]
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शिवरात्रि है – राम किशोर पाठकशिवरात्रि है – राम किशोर पाठक
छंद – घनाक्षरी शिव शंकर की भक्ति, श्रद्धा भाव यथाशक्ति, मिटाती यह आसक्ति, बनें दया-पात्र हैं। मनाएँ हर माह में,[...]
माँ – अश्मजा प्रियदर्शिनीमाँ – अश्मजा प्रियदर्शिनी
भू-तल पर जन-जीवन की तुम आशा हो। माँ तुम चराचर जगत की परिभाषा हो। तुम हीं लक्ष्मी, सरस्वती, तुमसे जीवन[...]
संसार के असली मर्म – अमरनाथ त्रिवेदीसंसार के असली मर्म – अमरनाथ त्रिवेदी
कोई भी कुछ कह ले सुन ले , इस दुनिया में कोई नहीं रह पाया है । जो इस मृत्यु[...]
बड़ा कठिन है रे मन -अवनीश कुमारबड़ा कठिन है रे मन -अवनीश कुमार
(श्रुतिकीर्ति की अंतरवेदना) बड़ा कठिन है रे मन! राजरानी बनकर अवध में रहना, और राजर्षि पति शत्रुघ्न का भ्रातृधर्म निभाने[...]
सुन री दीया – अवनीश कुमारसुन री दीया – अवनीश कुमार
सुन री दीया काश! तू सुन पाती, मेरी विरह-व्यथा समझ पाती। तेरी जलती लौ से, क्या-क्या अनुमान लगाऊं? मद्धिम पड़ती[...]
चित्रधारित सृजन – नीतू रानीचित्रधारित सृजन – नीतू रानी
जल से भरकर पात्र को रखना निशदिन भाय, आएगी चिड़िया पानी पीने जाएगी प्यास बुझाय। पीती है पानी चिड़िया हृदय[...]
पिता – गिरीन्द्र मोहन झापिता – गिरीन्द्र मोहन झा
परमपिता परमेश्वर हैं, हम सब उनके संतान, उन्हीं की अनुकम्पा से, हम सब सदा क्रियमाण । सबसे पहले परमपिता परमात्मा[...]
आम आदमी का अंदाज – हरिपद छंद – राम किशोर पाठकआम आदमी का अंदाज – हरिपद छंद – राम किशोर पाठक
आम आदमी का अंदाज – हरिपद छंद आज आदमी आम हो गया, नहीं रहा कुछ खास। बदल रहे अंदाज सभी[...]
जीवन-यात्रा – गिरीन्द्र मोहन झाजीवन-यात्रा – गिरीन्द्र मोहन झा
करना है, करते ही जाना है, बढ़ना है, बढ़ते ही जाना है, जब है सूर्य का तुममें वास, कोई अंधेरा[...]
