रूप घनाक्षरी छंद आपसी बढ़ाए प्रीत, लिखिए नवल गीत, अपने पराए हेतु, दिल में भरा हो प्यार। कोई नहीं बड़ा-छोटा,[...]
Category: Bhawna
धरती का मान बढ़ाएंगे – देव कांत मिश्र ‘दिव्यधरती का मान बढ़ाएंगे – देव कांत मिश्र ‘दिव्य
धरती का मान बढ़ाएंगे – विधा: गीत(१६-१६) जन्म लिए हैं दिव्य भूमि पर धरती का मान बढ़ाएँगे। रंग-बिरंगे फूल खिलाकर,[...]
सबको गले लगाएँ हम – राम किशोर पाठकसबको गले लगाएँ हम – राम किशोर पाठक
विधा: गीतिका भटके को राह दिखाएँ हम, सबको गले लगाएँ हम। कलुष भाव के घोर तिमिर में, प्रेम-पुंज फैलाएँ हम।।[...]
धरा विचार – मुक्तामणि छंद – राम किशोर पाठकधरा विचार – मुक्तामणि छंद – राम किशोर पाठक
धरा विचार – मुक्तामणि छंद धरती कहती प्रेम से, सुनें प्यार से बातें। भूल अगर करते नहीं, आज नहीं पछताते।।[...]
समीक्षा लोग ही करते – एस.के.पूनमसमीक्षा लोग ही करते – एस.के.पूनम
विधाता छंद (1) कलम है पास में मेरे, सदा तैयार लिखने को। पटल पर खास शब्दों को, उकेरा है सिखाने[...]
शेष नहीं – शिल्पीशेष नहीं – शिल्पी
बहरहाल अर्ध हूँ मैं मेरे शून्य का कुछ प्रतिशत मृत्यु के द्वार पर है खड़ा शेष बाट जोह रहा इसके[...]
शिवरात्रि है – राम किशोर पाठकशिवरात्रि है – राम किशोर पाठक
छंद – घनाक्षरी शिव शंकर की भक्ति, श्रद्धा भाव यथाशक्ति, मिटाती यह आसक्ति, बनें दया-पात्र हैं। मनाएँ हर माह में,[...]
माँ – अश्मजा प्रियदर्शिनीमाँ – अश्मजा प्रियदर्शिनी
भू-तल पर जन-जीवन की तुम आशा हो। माँ तुम चराचर जगत की परिभाषा हो। तुम हीं लक्ष्मी, सरस्वती, तुमसे जीवन[...]
संसार के असली मर्म – अमरनाथ त्रिवेदीसंसार के असली मर्म – अमरनाथ त्रिवेदी
कोई भी कुछ कह ले सुन ले , इस दुनिया में कोई नहीं रह पाया है । जो इस मृत्यु[...]
बड़ा कठिन है रे मन -अवनीश कुमारबड़ा कठिन है रे मन -अवनीश कुमार
(श्रुतिकीर्ति की अंतरवेदना) बड़ा कठिन है रे मन! राजरानी बनकर अवध में रहना, और राजर्षि पति शत्रुघ्न का भ्रातृधर्म निभाने[...]
