Category: Bhawna

महाराणा प्रताप – राम किशोर पाठकमहाराणा प्रताप – राम किशोर पाठक

0 Comments 3:41 pm

महाराणा प्रताप   राजस्थान के मेवाड़ में, सिसोदिया राजवंश था। वीर उदय सिंह द्वितीय का, जन्म लिया एक अंश था।।[...]

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मेरी मुन्नी- बाल कविता- राम किशोर पाठकमेरी मुन्नी- बाल कविता- राम किशोर पाठक

0 Comments 12:35 pm

मेरी मुन्नी सुबह खिड़की जब खोली माई, सूरज की किरणें थी आई। मुन्नी आँखें खोल न पाई, मईया ने आवाज[...]

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Manu Raman Chetna

दुश्मन के नापाक इरादे- मनु कुमारीदुश्मन के नापाक इरादे- मनु कुमारी

0 Comments 11:59 am

  दुश्मन के नापाक इरादे – ताटंक छंद   दुश्मन के नापाक इरादे, सफल नहीं हो पायेंगे। बुरी नजर से[...]

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Amarnath Trivedi

सिया के राम आए हैं- अमरनाथ त्रिवेदीसिया के राम आए हैं- अमरनाथ त्रिवेदी

0 Comments 11:42 am

Amarnath सिया के राम आए हैं मिलन फुलवारी की देखो, यहाँ सिया के राम छाए हैं। मिथिला की इन गलियों[...]

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Girindra Mohan Jha

सुखी कौन ? – गिरीन्द्र मोहन झासुखी कौन ? – गिरीन्द्र मोहन झा

0 Comments 8:36 pm

जो अपने दिन-रात व्यवस्थित कर ले, सुखी वही है। जिसका मन फलाफल के प्रति संतुष्ट है, सुखी वही है।। जो[...]

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Girindra Mohan Jha

कौन रुका है? – गिरीन्द्र मोहन झाकौन रुका है? – गिरीन्द्र मोहन झा

0 Comments 9:14 am

कौन रुका है? प्रश्न है कौन रुका है? सूर्य, मंदाकिनी का चक्कर लगाते, अवनि, सूर्य का चक्कर लगाती, मयंक, पृथ्वी[...]

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Snehlata

दहेज -डॉ. स्नेहलता द्विवेदी ‘आर्या’दहेज -डॉ. स्नेहलता द्विवेदी ‘आर्या’

0 Comments 7:18 pm

माँ के भला कोख़ में क्यों मरती बेटियाँ, जन्म लेती नमक क्यों हैं चखती बेटियाँ। समाज के दरिंदों तुम आवाज़[...]

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ram किशोर

जानकी नवमी – राम किशोर पाठकजानकी नवमी – राम किशोर पाठक

0 Comments 4:25 am

जनक के राज्य में ऐसा भयंकर ग्रीष्म आया था। सरोवर, खेत सूखे थें, नहीं कोई हल चलाया था।। किया था[...]

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आदमी और जंगल- संजय कुमारआदमी और जंगल- संजय कुमार

0 Comments 6:13 pm

बूढ़ा बरगद रो-रोकर, यूं मुझसे कहने लगा! क्या बिगाड़ा था? क्या बिगाड़ा था हमने? कि तुम और तुम्हारी जात ने,[...]

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Snehlata

माँ सम्पूर्ण ब्रह्म -स्नेहलता द्विवेदी “आर्यामाँ सम्पूर्ण ब्रह्म -स्नेहलता द्विवेदी “आर्या

0 Comments 6:04 pm

माँ! शब्द नही ब्रह्म! संतति का सर्वस्व! निर्मल मोहक सौंदर्य! माँ! अद्भुत आनंद! धरा का स्वर्ग। सृष्टि में अतुल्य! माँ![...]

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