Category: Bhawna

Girindra Mohan Jha

कौन रुका है? – गिरीन्द्र मोहन झाकौन रुका है? – गिरीन्द्र मोहन झा

0 Comments 9:14 am

कौन रुका है? प्रश्न है कौन रुका है? सूर्य, मंदाकिनी का चक्कर लगाते, अवनि, सूर्य का चक्कर लगाती, मयंक, पृथ्वी[...]

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Snehlata

दहेज -डॉ. स्नेहलता द्विवेदी ‘आर्या’दहेज -डॉ. स्नेहलता द्विवेदी ‘आर्या’

0 Comments 7:18 pm

माँ के भला कोख़ में क्यों मरती बेटियाँ, जन्म लेती नमक क्यों हैं चखती बेटियाँ। समाज के दरिंदों तुम आवाज़[...]

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ram किशोर

जानकी नवमी – राम किशोर पाठकजानकी नवमी – राम किशोर पाठक

0 Comments 4:25 am

जनक के राज्य में ऐसा भयंकर ग्रीष्म आया था। सरोवर, खेत सूखे थें, नहीं कोई हल चलाया था।। किया था[...]

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आदमी और जंगल- संजय कुमारआदमी और जंगल- संजय कुमार

0 Comments 6:13 pm

बूढ़ा बरगद रो-रोकर, यूं मुझसे कहने लगा! क्या बिगाड़ा था? क्या बिगाड़ा था हमने? कि तुम और तुम्हारी जात ने,[...]

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Snehlata

माँ सम्पूर्ण ब्रह्म -स्नेहलता द्विवेदी “आर्यामाँ सम्पूर्ण ब्रह्म -स्नेहलता द्विवेदी “आर्या

0 Comments 6:04 pm

माँ! शब्द नही ब्रह्म! संतति का सर्वस्व! निर्मल मोहक सौंदर्य! माँ! अद्भुत आनंद! धरा का स्वर्ग। सृष्टि में अतुल्य! माँ![...]

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Jainendra

मित्रवत व्यवहार – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’मित्रवत व्यवहार – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

0 Comments 8:14 pm

रूप घनाक्षरी छंद आपसी बढ़ाए प्रीत, लिखिए नवल गीत, अपने पराए हेतु, दिल में भरा हो प्यार। कोई नहीं बड़ा-छोटा,[...]

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Devkant

धरती का मान बढ़ाएंगे – देव कांत मिश्र ‘दिव्यधरती का मान बढ़ाएंगे – देव कांत मिश्र ‘दिव्य

0 Comments 8:09 pm

धरती का मान बढ़ाएंगे – विधा: गीत(१६-१६) जन्म लिए हैं दिव्य भूमि पर धरती का मान बढ़ाएँगे। रंग-बिरंगे फूल खिलाकर,[...]

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ram किशोर

सबको गले लगाएँ हम – राम किशोर पाठकसबको गले लगाएँ हम – राम किशोर पाठक

0 Comments 7:54 pm

विधा: गीतिका भटके को राह दिखाएँ हम, सबको गले लगाएँ हम। कलुष भाव के घोर तिमिर में, प्रेम-पुंज फैलाएँ हम।।[...]

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ram किशोर

धरा विचार – मुक्तामणि छंद – राम किशोर पाठकधरा विचार – मुक्तामणि छंद – राम किशोर पाठक

0 Comments 7:05 pm

धरा विचार – मुक्तामणि छंद धरती कहती प्रेम से, सुनें प्यार से बातें। भूल अगर करते नहीं, आज नहीं पछताते।।[...]

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S K punam

समीक्षा लोग ही करते – एस.के.पूनमसमीक्षा लोग ही करते – एस.के.पूनम

0 Comments 7:02 pm

विधाता छंद (1) कलम है पास में मेरे, सदा तैयार लिखने को। पटल पर खास शब्दों को, उकेरा है सिखाने[...]

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