Category: padyapankaj

Through Padyapankaj, Teachers Of Bihar give you the chance to read and understand the poems and padya of Hindi literature. In addition, you can appreciate different tastes of poetry, including veer, Prem, Raudra, Karuna, etc.

Dharmendra Kumar Thakur

अमृतमयी शरद पूर्णिमा – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरअमृतमयी शरद पूर्णिमा – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

0 Comments 8:48 pm

अमृतमयी शरद पूर्णिमा – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर आया शरद पूर्णिमा का त्योहार, प्रकृति कर रही अनुपम श्रृंगार। नभ मंडल में[...]

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Dharmendra Kumar Thakur

ई-कचरा: सजगता – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरई-कचरा: सजगता – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

0 Comments 8:45 pm

ई-कचरा: सजगता – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर खराब, पुराने, बंद पड़े जो, बिजली के सामान हैं, मोबाइल, टीवी, कंप्यूटर, फ्रिज, ई-कचरे[...]

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Rinju Singh

चाँद की बात ही कुछ निराली – रिंजु कुमारीचाँद की बात ही कुछ निराली – रिंजु कुमारी

0 Comments 8:41 pm

चाँद की बात ही कुछ निराली – रिंजु कुमारी चाँद की बात ही कुछ निराली होती है, उसकी चाँदनी में[...]

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Rinju Singh

अमृतमयी चाँदनी  – रिंजु कुमारीअमृतमयी चाँदनी  – रिंजु कुमारी

0 Comments 8:37 pm

अमृतमयी चाँदनी  – रिंजु कुमारी शरद पूर्णिमा की चाँदनी में, खीर का भी अंदाज़ निराला होगा, चाँदनी की अमृत वर्षा[...]

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Umesh kumar sinha

अमृत बरसाती चाँदनी – उमेश कुमार सिन्हा अमृत बरसाती चाँदनी – उमेश कुमार सिन्हा 

0 Comments 8:33 pm

अमृत बरसाती चाँदनी – उमेश कुमार सिन्हा  शरद पूर्णिमा आई है, चाँदनी छिटक रही अपार, धवल चाँद की छटा निराली,[...]

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Girindra Mohan Jha

धैर्य और सहिष्णुता – गिरीन्द्र मोहन झाधैर्य और सहिष्णुता – गिरीन्द्र मोहन झा

0 Comments 11:48 pm

धैर्य और सहिष्णुता – गिरीन्द्र मोहन झा धैर्य और सहिष्णुता मनुष्य की बहुत बड़ी शक्ति है। किसी भी परिस्थिति में[...]

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Dharmendra Kumar Thakur

वसुधैव कुटुम्बकम – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरवसुधैव कुटुम्बकम – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

0 Comments 11:44 pm

वसुधैव कुटुम्बकम – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर अयं निजः पर वेति, सोच यह छोटी भाई। उदार मन के हेतु, धरा परिवार[...]

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Dharmendra Kumar Thakur

सहेली जंग – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरसहेली जंग – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

0 Comments 8:25 pm

सहेली जंग – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर हम कहाँ हैं, किस दोराहे पर खड़ा संसार है? बैर भी छलावा यहाँ, बस[...]

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Dharmendra Kumar Thakur

ध्वनि एक अर्थ अनेक – धर्मेंद्र कुमार ठाकुरध्वनि एक अर्थ अनेक – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर

0 Comments 8:22 pm

ध्वनि एक, अर्थ अनेक – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर सुनने और पढ़ने में जो, लगते एक समान। पर अर्थों की दृष्टि[...]

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Rinju Singh

हर दिन, हर घड़ी – रिंजु कुमारीहर दिन, हर घड़ी – रिंजु कुमारी

0 Comments 8:14 pm

हर दिन, हर घड़ी – रिंजु कुमारी हर दिन, हर घड़ी समस्याओं से घिरे रहते हैं, कभी दर्द, कभी उलझनों[...]

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