Category: padyapankaj

Through Padyapankaj, Teachers Of Bihar give you the chance to read and understand the poems and padya of Hindi literature. In addition, you can appreciate different tastes of poetry, including veer, Prem, Raudra, Karuna, etc.

Devkant

प्राची की लाली – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’प्राची की लाली – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 2:59 pm

प्राची की सुंदर छवि लाली सबको नित संदेश सुनाती। जगो-उठो दो-पा खुशहाली पुरखों से पाई यह थाती।। रश्मि सूर्य की[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Manu Raman Chetna

झांसी की महारानी – मनु रमण चेतनाझांसी की महारानी – मनु रमण चेतना

0 Comments 2:57 pm

आओ सुनाएं एक कहानी झांसी की महारानी की निज शौर्य पराक्रम से लिख दी जो नाम अमर बलिदानी की अंग्रेज़ों[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
S K punam

सृष्टि देते उपहार – एस.के.पूनमसृष्टि देते उपहार – एस.के.पूनम

0 Comments 2:55 pm

दरिया में जल मिले, सागर में नदियाँ भी, धरती आकाश मिल सृष्टि देते उपहार। कहीं-कहीं छाँह धूप, चुभते दिलों में[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Ratna Priya

वरदान है यह योग का – रत्ना प्रियावरदान है यह योग का – रत्ना प्रिया

1 Comment 2:46 pm

स्वस्थ शरीर , स्वच्छ मन व आत्मिक संयोग का, मानवी काया दिव्य हो , वरदान है यह योग का ।[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

पर्यावरण – मीरा सिंह “मीरा”पर्यावरण – मीरा सिंह “मीरा”

0 Comments 3:03 pm

बंद करो वृक्षों को काटना नदियां सागर दूषित करना। वृक्ष धरा के हैं आभूषण वृक्ष लगाओ मानो कहना।। कोरे नारे[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Vinay

इम्तिहान – विनय विश्वाइम्तिहान – विनय विश्वा

0 Comments 3:02 pm

  इम्तिहान ललिता अपनी परीक्षा की तैयारी कर रही थी,और साथ ही उसकी सच्ची दोस्त साहिदा उससे कुछ प्रश्न पूछ रही[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Nitu Rani

सिहर उठता हूँ देखकर –सिहर उठता हूँ देखकर –

0 Comments 10:36 pm

अब ये दुनियाँ -दुनियाँ न रहा, सिहर उठता हूँ इस दुनियाँ को देखकर। इस दुनियाँ में हो रहे चोरी डकैती[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Jainendra

दहेज रूपी दानव – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’दहेज रूपी दानव – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 10:35 pm

देश से विदेश तक, धरती अम्बर तक, सभी जगह बेटियां , छोड़ रही आज छाप। बेटियों को बेटा मान,लालन पालन[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Devkant

दोहा – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’दोहा – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 10:24 pm

रिश्ता हो कायम सदा, भरते रहें मिठास। अपनेपन का भाव रख, करिए सुखद उजास।। ईश-याचना नित करें, रखें न कपट[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें