देखो आया शुभद, आज कई संयोग। रजनी लगती नवल, चकवा का हठयोग।। पूनम सुंदर धवल, लेकर आयी रूप। आज पूर्णिमा शरद, अंबर लगे अनूप।। सोम देव से किरण, छिटक रही…
Category: sandeshparak
Sandeshparak poems are poems that are used to convey a message with feelings. Through poems, statements related to the country, the world, and society are transmitted to the people. Teachers of Bihar give an important message through the Sandeshparak of Padyapankaj.
बहती गंगा-सी पुण्यधार रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
पद्धरी छंद सम-मात्रिक छंद, 16 मात्राएँ आरंभ द्विकल से, पदांत Sl अनिवार्य। मां सिद्धिदायिनी दिव्य भाल। दिखते हैं सागर से विशाल।। कर अभ्यागत की पूर्ण आस। भर दें संस्कारित…
रावणी गुण- राम किशोर पाठक
हत्या चोरी आचार यौन । झूठी वाणी रहना न मौन।। भाषा विभक्त-कारी कठोर। धारे लालच लोभ घनघोर।। कारण प्रभाव देता नकार। व्यर्थ गपशपी सदा व्यवहार।। ईर्ष्या क्रोध घृणा से प्रवीण।…
अपने सपने – राम किशोर पाठक
अपने सपने- मणिमाल वार्णिक छंद कहता यहाँ हर शख्स है, करता यहाँ पर कौन।जब भी उठी यह बात तो, रहते यहाँ सब मौन।।मिलते हमें अपने सभी, मिलता नहीं कुछ खास।पलकें…
द्विज के गुण – राम किशोर पाठक
द्विज एक रूप दिव्य जगत में। ज्ञान धर्म कर्म श्रेष्ठ सतत में।। तेज सूर्य का सहन है करता। विष्णु वक्ष पर पग रख सकता।। रक्षण करता है वेदों का। भक्षण…
नया समाज बनाना होगा – गीत – राम किशोर पाठक
नया समाज बनाना होगा – गीत आओ मिलकर हम-सब सोचे, समाधान कुछ पाना होगा। जन-जन के उत्कर्ष हेतु अब, नया समाज बनाना होगा।। सदी इक्कीसवीं आयी है, दुनिया जिसकी गाथा…
वंदनवार सजे शारदा – कुंडलिया छंद – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
पेड़ लगा मां के नाम से, होंगे जग में नाम। उनके ही नेपथ्य में, पाना चिर विश्राम।। पाना चिर विश्राम, जगत में स्वर्ग मिलेगा। श्रम सुंदर तालाब के, पंक में…
देश हमारा -राम किशोर पाठक
देश हमारा हरपल आगे। भारत वासी जब-जब जागे।। आदर देते हम-सब आएँ। भारत माँ की जय-जय गाएँ।। देव यहीं भूतल पर आते। धन्य धरा को कर सब जाते।। भूतल है…
हिंदी भाषा की गरिमा – राम किशोर पाठक
हिंदी भाषा की गरिमा को, उच्च शिखर पहुँचाना होगा। हिंदी के प्रति जन-मानस में, प्रेम अटूट जगाना होगा।। रामचरित रचकर तुलसी मान बढ़ाएँ। हिंदी भाषा की गरिमा को अपनाएँ।। घर-घर…
एक पेड़ माँ के नाम
आओ हम सब मिलकर करें, एक काम । चलो लगाते हैं ”एक पेड़ माँ के नाम”।। छाँव देते इसके पत्ते, लगते माँ के आँचल जैसे । याद आती…