फिर संस्कृत अपनाइए – दोहावली – राम किशोर पाठक

फिर संस्कृत अपनाइए – दोहावली फिर संस्कृत अपनाइए, यह संस्कृति की जान। इस भाषा के अन्त: में, भरा पड़ा विज्ञान।।१।। अपनी संस्कृति बचाएँ, दे संस्कृत को मान। इसके अंदर है…

संस्कृतम् अहं पठामि – राम किशोर पाठक

संस्कृतम् अहं पठामि भाषायाम् जननी अहं नमामि। सखे! संस्कृतम् अहं पठामि।। ज्ञानं वा विज्ञानं वा सर्वे इव धार्यते। मानवोत्थानाय सुकृतं इव कार्यते।। उत्थानाय सर्वेषां इव अनुसरामि। सखे! संस्कृतम् अहं पठामि।।…

सहज धरा को स्वर्ग बनाएँ – अंजनेय छंद गीतिका – राम किशोर पाठक

सहज धरा को स्वर्ग बनाएँ – अंजनेय छंद गीतिका आओ मिलकर देश सजाएँ। जन-मानस को पाठ पढाएँ।। सभी भेद का त्याग करें हम। सबको सबसे गले लगाएँ।। होड़ मची बस…

शिक्षा है अधिकार हमारा – गीतिका – राम किशोर पाठक

शिक्षा है अधिकार हमारा – गीतिका शिक्षा है अधिकार हमारा। इससे बनता जीवन प्यारा।। नित्य हमें विद्यालय जाना। गुरुवर देते जहाँ सहारा।। कौशल अपना हमें बढ़ाना। निपुण बनें का लक्ष्य…

विवेकानंद – अहीर छंद – राम किशोर पाठक

विवेकानंद – अहीर छंद मानव का निज धर्म । किए सदा शुचि कर्म।। लिए अलौकिक ज्ञान। दिए अलग पहचान।। अद्भुत बुद्धि विवेक। विवेकानंद नेक।। सपने लिए अनेक। करना भारत एक।।…

वर्षा और जीवन – अंजनेय छंद – राम किशोर पाठक

वर्षा और जीवन – अंजनेय छंद धूम मचाकर बरसा आती। नभ में अपनी नाच दिखाती।। भिन्न-भिन्न वह वेश बनाती। अवनी देख जिसे इठलाती।। मन का मयूर झूम रहा है। धरती…

अपनी माटी से जुड़े – दोहावली – देवकांत मिश्र ‘दिव्य’

अपनी माटी से जुड़ें “””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””” अपनी माटी से जुड़ें, करें सदा गुणगान। बनी इसी से देह है, यही ईश वरदान।।०१ माटी में हैं गुण बहुत, यही जीवनाधार। रंग बनावट जानिए,…