शिक्षा और समाज – नीतू रानी

शिक्षा और समाज बिना शिक्षा के मिटै न अंधकार। शिक्षा से समाज का होता अधिक विकास, पढ़-लिखकर शिक्षित होंगे हमारे देश के सभी समाज। हमारे समाज में बच्चे, बूढ़े, नर-…

रूपघनाक्षरी – शृंगार – एस.के.पूनम

ऊँ कृष्णाय नमः विधा:-रूपघनाक्षरी। विषय:-शृंगार। उठती हैं सागर में, तरंगें हजारों बार, सिन्धु करे जल राशि,से शृंगार बार-बार। केवट है नैया पर, गाते गीत मलहार, झूम रहे संगी-साथी,पहुँचे हैं उस…

सर्द हवा-राम किशोर पाठक 

सर्द हवाओं का झोंका है। अम्मा ने मुझको रोका है।। कहती बाहर में खतरा है। सर्दी का पग-पग पहरा है।। देखो छाया घना कोहरा। सूरज का छिप गया चेहरा।। बूँद…

अनुराग सवैया –  राम किशोर पाठक

अनुराग सवैया –  राम किशोर पाठक गणेश महेश सुरेश दिनेश पुकार करूँ नित आस लगाएँ। विकार सुधार विचार प्रचार निखार रहा निज दोष गिनाएँ।। अबोध सदा यह बालक है प्रभु…

बचपन-गिरीन्द्र मोहन झा

खेलना, मस्ती करना, बड़े-बड़े ख्वाब देखना, पढ़ाई करना, जिज्ञासु प्रवृत्ति का हो जाना, बड़े-बड़े सपने देखना, पर धरातल से सदा जुड़े रहना, समय पर पढ़ाई-लिखाई करना, सहयोग भावना रखना, अच्छी…

संस्कार-गिरीन्द्र मोहन झा

कहता हूं, व्यक्ति अपने संस्कार का ही होता है गुलाम, सुसंस्कारवश अच्छा काम करता, कुसंस्कार से बुरा काम, अच्छा संस्कार सत्कर्मों, सद्विचारों के चिंतन से ही बनता है, कुकृत्यों, बुरे…