गुरु…। आपसे ही तो हम हैं
मिट्टी थे हम, आकार दिया,
अज्ञान के तम को पार किया,
खुद जलकर दीपक बनकर
जीवन में उजियार किया।
उँगली पकड़कर चलना सिखाया,
गिरकर फिर उठना सिखाया,
हार गए जब जीवन से हम,
आपने जीतना सिखाया।
गुरु… आपसे ही तो हम हैं,
आपसे ही पहचान हमारी,
आपने जो संस्कार दिए हैं,
वही है सबसे बड़ी पूँजी हमारी।
कभी डाँट में प्यार छिपा था,
कभी मौन में सीख मिली,
आपकी हर एक बात ने
जीने की नई राह दी।
आज खड़े हैं आपके सामने,
आँखों में सम्मान लिए,
शब्द हमारे छोटे पड़ जाएँ,
दिल में आपका नाम लिए।
कल हम इस आँगन से निकलेंगे,
नई दिशाओं में जाएँगे,
पर आपकी दी हुई सीख को
हर कदम साथ ले जाएँगे।
यदि जीवन में नाम कमाएँ,
तो श्रेय आपको ही देंगे,
हमारी हर एक सफलता में
आपका आशीष देखेंगे।
और जब कभी अकेले होंगे,
जब मन थोड़ा घबराएगा,
कक्षा का वह आपका चेहरा
चुपके से याद आएगा।
गुरु कभी विदा नहीं होते,
गुरु तो हृदय में रहते हैं,
शिष्य चाहे जहाँ चला जाए,
गुरु उसके भीतर रहते हैं।
गुरुवर! आपने हमें पढ़ाया नहीं,
हमें इंसान बनाया है।
आपके चरणों में नमन हमारा,
आपको शत-शत प्रणाम…
आपके दिए ज्ञान से रोशन
होता रहे हमारा नाम।
गुरु हैं तो ज्ञान है,
गुरु हैं तो सम्मान है,
गुरु हैं तो जीवन में
सच्ची पहचान है।
हे गुरुवर… स्वीकार करें
शिष्यों का यह प्रणाम। 🙏
GAURI SHANKAR SINGH
UMS CHAKSINGAR
RAGHOPUR VAISHALI
Gauri shankar Singh

