ये कैसे दोस्त हैं मेरे मुझे बूढ़ा होने नहीं देते सभी दूर हैं मुझसे कोई नहीं है आस-पास। पर सभी[...]
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शरद पूर्णिमा – रूचिकाशरद पूर्णिमा – रूचिका
शरद पूर्णिमा का सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता चाँद। दूधिया रोशनी बिखेरता प्रेम चाँदनी संग दिलोंजान से करता। घटता[...]
दोहावली- रामकिशोर पाठकदोहावली- रामकिशोर पाठक
अपने मन की कीजिए, रखकर मन में चाव। औरों की वो मानिए, जो हो सही सुझाव।। सत्य वचन हीं[...]
सत्प्रवृत्ति के सोपान – अमरनाथ त्रिवेदीसत्प्रवृत्ति के सोपान – अमरनाथ त्रिवेदी
कर्त्तव्य हमारे ऐसे हों नित , जहाँ मन की मलिनता न छाए। सदुपयोग, अधिकार का ऐसे करें , जहाँ अहंकार[...]
चिड़िया रानी – रूचिकाचिड़िया रानी – रूचिका
चूँ चूँ करती चिड़िया आती दाना-पानी कहाँ से लाती। क्या खाती और क्या वह पीती, बोलो बोलो कैसे वह जीती।।[...]
मम्मी दुनिया से निराली है – अमरनाथ त्रिवेदीमम्मी दुनिया से निराली है – अमरनाथ त्रिवेदी
दुनिया चाहे कुछ भी कह ले मम्मी ही हमारी जान है। हर सुख-दुःख में साथ वह देती , मम्मी ही [...]
मेरे राम- स्नेहलता द्विवेदी ‘आर्या’मेरे राम- स्नेहलता द्विवेदी ‘आर्या’
राम जप है, राम तप है, राम आदि अंत है। राम राग, राम त्याग, राम तो अनंत है। राम[...]
देवी माँ- कुमकुम कुमारी ‘काव्याकृति’देवी माँ- कुमकुम कुमारी ‘काव्याकृति’
देवी माँ के असली रूप को भला कौन है जान पाया, जैसा जिसका भाव माँ ने उसको वैसा रूप[...]
हरिगीतिका- रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’हरिगीतिका- रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
नवरात्रि में माॅं अन्नपूर्णा, रोहिणी कहलाइए। तू सात्त्विकी कल्याणकारी, चंडिका बन आइए।। काली त्रिमूर्ति महेश्वरी भव, भद्रकाली नाम हैं। आराधना[...]
कालरात्रि माँ- रूचिकाकालरात्रि माँ- रूचिका
माँ कालरात्रि संकट दूर करो देवी त्रिनेत्री। रोग नाशिनी, दया करो माँ दुर्गे जग तारिणी। जय चामुंडा, साहस भर[...]
