संग हरियाली के जी ले पल दो पल, करती सरिता जहाँ पग-पग कल-कल। मनहर-सी छटा छाई धरा पर हरपल,[...]
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बेटी के मायने – अमरनाथ त्रिवेदीबेटी के मायने – अमरनाथ त्रिवेदी
बेटी है तो यह घर संसार है। बेटी है तो संबधों के आधार हैं।। बेटी है तो संबंधों में संचार [...]
राजू के घर चली मासी – अवनीश कुमारराजू के घर चली मासी – अवनीश कुमार
राजू के घर चली मासी बच्चों के लिए ली गरमा-गरम समोसे। रास्ते मे बंदर आया, झपटा थैला, ले गए[...]
इंद्रधनुष – देवकांत मिश्र ‘दिव्य’इंद्रधनुष – देवकांत मिश्र ‘दिव्य’
नभ में इंद्रधनुष को देखो, कितना प्यारा लगता है। मन करता है इसको छू लें, सुंदर न्यारा लगता है।। प्रथम[...]
गीत- रामपाल प्रसाद सिंहगीत- रामपाल प्रसाद सिंह
आज जयंती है दिनकर की, अपनी रचना लिखकर गाओ। जिसने लिखकर समय को मोड़ा, उनकी रचना सुनो सुनाओ।। विषम काल[...]
अद्वितीय कवि दिनकर – अमरनाथ त्रिवेदीअद्वितीय कवि दिनकर – अमरनाथ त्रिवेदी
एक अद्वितीय कवि दिनकर केवल बातों पर ही बात नहीं, तथ्यों पर प्रखर रूप से बात करे। कवि वैसा हो[...]
अद्वितीय कवि दिनकर – अमरनाथ त्रिवेदीअद्वितीय कवि दिनकर – अमरनाथ त्रिवेदी
एक अद्वितीय कवि दिनकर केवल बातों पर ही बात नहीं, तथ्यों पर प्रखर रूप से बात करे। कवि वैसा हो[...]
मेरी हर यात्रा- अवनीश कुमारमेरी हर यात्रा- अवनीश कुमार
सुन री सखी-सहेली! वे राम बने, मैं मर्यादा की सीमा बनूँ, वे कृष्ण बने, मैं राधा की काया बनूँ,[...]
बेटियाँ- मधु कुमारीबेटियाँ- मधु कुमारी
बेटा वंश तो वंश की नींव होती है बेटियाँ! दो कुलों की आन-बान-शान होती है बेटियाँ! कुदरत जब हो[...]
बेटियाँ- गिरीन्द्र मोहन झाबेटियाँ- गिरीन्द्र मोहन झा
धन्य वह गेह, जहाँ खिलखिलाती हैं बेटियाँ, धन्य वह गेह, जहाँ चहचहाती हैं बेटियाँ, धर्म-ग्रंथ कहते हैं, गृह-लक्ष्मी होती बहु-बेटियाँ,[...]
