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जंगल में मंगल – मधु कुमारीजंगल में मंगल – मधु कुमारी

0 Comments 8:48 pm

  संग हरियाली के जी ले पल दो पल, करती सरिता जहाँ पग-पग कल-कल। मनहर-सी छटा छाई धरा पर हरपल,[...]

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Amarnath Trivedi

बेटी के मायने – अमरनाथ त्रिवेदीबेटी के मायने – अमरनाथ त्रिवेदी

0 Comments 10:51 am

बेटी है तो यह घर संसार है। बेटी है तो संबधों के आधार हैं।। बेटी है तो संबंधों में संचार [...]

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Awanish Kumar Avi

राजू के घर चली मासी – अवनीश कुमारराजू के घर चली मासी – अवनीश कुमार

0 Comments 10:26 am

  राजू के घर चली मासी बच्चों के लिए ली गरमा-गरम समोसे। रास्ते मे बंदर आया, झपटा थैला, ले गए[...]

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इंद्रधनुष – देवकांत मिश्र ‘दिव्य’इंद्रधनुष – देवकांत मिश्र ‘दिव्य’

0 Comments 10:15 am

नभ में इंद्रधनुष को देखो, कितना प्यारा लगता है। मन करता है इसको छू लें, सुंदर न्यारा लगता है।। प्रथम[...]

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गीत- रामपाल प्रसाद सिंहगीत- रामपाल प्रसाद सिंह

0 Comments 8:47 pm

आज जयंती है दिनकर की, अपनी रचना लिखकर गाओ। जिसने लिखकर समय को मोड़ा, उनकी रचना सुनो सुनाओ।। विषम काल[...]

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Amarnath Trivedi

अद्वितीय कवि दिनकर – अमरनाथ त्रिवेदीअद्वितीय कवि दिनकर – अमरनाथ त्रिवेदी

0 Comments 6:32 pm

एक अद्वितीय कवि दिनकर केवल  बातों  पर  ही  बात  नहीं, तथ्यों  पर प्रखर रूप से बात करे। कवि वैसा हो[...]

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Amarnath Trivedi

अद्वितीय कवि दिनकर – अमरनाथ त्रिवेदीअद्वितीय कवि दिनकर – अमरनाथ त्रिवेदी

0 Comments 4:53 pm

एक अद्वितीय कवि दिनकर केवल  बातों  पर  ही  बात  नहीं, तथ्यों  पर प्रखर रूप से बात करे। कवि वैसा हो[...]

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Awanish Kumar Avi

मेरी हर यात्रा- अवनीश कुमारमेरी हर यात्रा- अवनीश कुमार

0 Comments 4:49 pm

  सुन री सखी-सहेली! वे राम बने, मैं मर्यादा की सीमा बनूँ, वे कृष्ण बने, मैं राधा की काया बनूँ,[...]

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बेटियाँ- गिरीन्द्र मोहन झाबेटियाँ- गिरीन्द्र मोहन झा

0 Comments 4:37 pm

धन्य वह गेह, जहाँ खिलखिलाती हैं बेटियाँ, धन्य वह गेह, जहाँ चहचहाती हैं बेटियाँ, धर्म-ग्रंथ कहते हैं, गृह-लक्ष्मी होती बहु-बेटियाँ,[...]

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