पद्यपंकज sandeshparak,प्रेम,बाल कविता दादा-दादी दिवस – उमेश कुमार सिन्हा 

दादा-दादी दिवस – उमेश कुमार सिन्हा 



दादा-दादी की बचपन की बातें खूब मुझे याद आती हैं,

गाँव में जाकर उनके संग खुशियाँ खूब मनाती हैं।

जब दादी का फोन आता, मन प्रसन्न और खिल जाता,

सुंदर-सुंदर कथा-कहानियों का संसार सामने आ जाता।

वीडियो कॉल पर दादा-दादी का चेहरा जब स्क्रीन पर आता,

बचपन फिर से लौटकर जैसे मन को खूब हँसाता।

दादा जी पूछते— “पढ़ाई ठीक से करना, मेरे आँखों के तारे,

पौत्र-पौत्री हो तुम मेरे, तुम ही तो हो सबसे प्यारे।

पढ़-लिखकर आगे बढ़ना, यही मेरी तुमसे आशा,

नहीं तो मैं रूठ जाऊँगा, बंद कर दूँगा फिर हँसी-मजाक की भाषा!”

बहुत प्यार करते दादा-दादी, कभी उदास नहीं होने देते,

माँ-पिता से डाँट पड़े तो गोद में उठाकर प्यार से सहला देते।

कहते— “बेटे के बेटे-बेटी हो, तुमसे मेरा बुढ़ापा सँवरता,

तुम्हारी हँसी देखकर ही तो मेरा मन हर पल निखरता।”

आज इस दिवस पर शुभकामना का संदेश मैंने भेजा है,

दो शब्द प्रेम और नमन के हृदय से भेजा है।

बचपन की तस्वीर दादा-दादी के साथ खिंचवाई है,

इस पावन दिवस पर उसे फ्रेम में सजाकर लाई है।

पश्चिमी सभ्यता ने कहीं रिश्तों में दूरी बढ़ाई है,

पर दादा-दादी की ममता ने हर दूरी मिटाई है।

आज इस दिवस पर हम सब नन्हे बालक मिलकर,

दादा-दादी दिवस मनाएँगे हर्षित होकर।

मम्मी-पापा को संस्कार देने वाला यह रिश्ता,

बुजुर्गों के सम्मान का देता सुंदर-सा संदेश।

अनाथ आश्रम नहीं, अपने दिल में जगह दिलाएँ,

दादा-दादी के चरणों में प्रेम के दीप जलाएँ।

हर्ष-उल्लास के साथ दादा-दादी दिवस मनाएँगे,

उनके असीम ज्ञान-भंडार से जीवन को सजाएँगे।

उनके अनुभव की रोशनी में आगे बढ़ते जाएँगे,

जीवन की हर राह पर उनसे सीखते जाएँगे।

इस सुनहरे दादा-दादी दिवस के अवसर पर,

बाग लगाने वाले बागवान का पूरा हक दिलाएँगे।

जिन्होंने प्रेम से जीवन का उपवन हमें सँवारा,

उनके चरणों में अर्पित हो सम्मान हमारा।

दादा-दादी केवल रिश्ता नहीं, संस्कारों की पहचान हैं,

उनके आशीष में छिपे जीवन के अनमोल ज्ञान हैं।

आओ, उनके प्रेम और अनुभव को अपना धन बनाएँ,

दादा-दादी दिवस पर रिश्तों की गरिमा बचाएँ।

आज दिवस पर दादा दादी से स्वादिष्ट चॉकलेट खाए 

आश्चर्य खुशनुमा चेहरा बनाए!

स्वरचित रचनाकार :-

उमेश कुमार सिन्हा निर्देशक 

डिसेंट एकेडमी वाया स्कूल रघुनाथपुर 

अंचल – ब्रह्मपुर ,जिला – बक्सर

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