पद्यपंकज Bhakti,Festival,padyapankaj,Teachers Of Bihar,ToB PadhyaPankaj,काव्य लेखन दुर्गा माँ – रंजना कुमारी

दुर्गा माँ – रंजना कुमारी



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दुर्गा माँ – रंजना कुमारी

माँ, तुम तो शक्ति की देवी हो,
तुम्हारे नौ रूपों में नारी की महिमा गाते हैं,
तुम्हारी पूजा में सिर झुकाते हैं,
तुम्हारे चरणों में शीश नवाते हैं,
लेकिन तुम्हारे ही इस संसार में
जब किसी बेटी के जन्म की खबर आती है,
तो घरों में खुशियाँ क्यों नहीं मनाई जातीं?

जब किसी नारी पर अत्याचार होता है,
जब किसी बेटी की अस्मिता लूटी जाती है,
जब दहेज के नाम पर किसी बहू को जलाया जाता है,
जब किसी माँ की आँखों से आँसू बहते हैं,
तब तुम्हारे भक्तों की श्रद्धा कहाँ चली जाती है, माँ?

तुम्हारे सामने तो हम
नारी को शक्ति का स्वरूप मानते हैं,
लेकिन घर की चारदीवारी के भीतर
उसी नारी को कमजोर समझते हैं।
माँ, तुम्हारे हाथों में तो अस्त्र-शस्त्र हैं,
तुम दुष्टों का संहार करती हो,
फिर इस धरती पर
बेटियों की सुरक्षा के लिए
कोई आगे क्यों नहीं आता?

माँ, अगली बार जब तुम आना,
तो अपने साथ केवल आशीर्वाद मत लाना,
इस समाज की सोच बदलने की शक्ति भी लाना।
हर घर में बेटी के जन्म पर उत्सव हो,
हर बेटी को शिक्षा और सम्मान मिले,
हर नारी को अपनी इच्छा से जीने का अधिकार मिले,
और किसी माँ को अपनी बेटी की सुरक्षा के लिए
हर पल डरकर न जीना पड़े।

 

रंजना कुमारी
जे यू  एच एस खम्हार विभूतिपुर समस्तीपुर l

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