पद्यपंकज Uncategorized परोपकार – गिरींद्र मोहन झा

परोपकार – गिरींद्र मोहन झा


Girindra Mohan Jha

परोपकार
आत्मप्रगति के संग जिनका हो परोपकारी जीवन,
उन्हीं का जीवन धन्य है, है धन्य उन्हीं का मरण,
अपनी जीवन-यात्रा पर ध्यान देते सदा आगे बढ़,
आत्मप्रगति संग बिना अभिमान के परोपकार कर,
बिना प्रत्युपकार की आशा के तू सदा उपकार कर,
अपने किये उपकार को भूल, कोई अभिमान न कर,
प्रभु को कर्ता, खुद को अकर्ता जान, सतत आगे बढ़,
हजार अपकार भुलाकर भी खुद पर कृत उपकार को सदा याद रख,
भली-भलाई ही निशान छोड़ता है, ‘कर भला तो हो भला’ मंत्र याद रख ।
…..गिरीन्द्र मोहन झा

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