गुरु के बिना ज्ञान नही ,
ज्ञान के बिना कोई महान नही ।
भटक जाता है जब इंसान,
तब गुरु ही देते हैं सच्चा ज्ञान ।
गुरु हैं चारों तीरथ – धाम,
इनको कोटि – कोटि है प्रणाम ।
जीवन हमारा है उपवन तो,
गुरु उपवन के है माली ।
सच्चे मन से गुरु – चरणों में,
जो कोई भी शीश झुकाता ।
उसकी किस्मत का दरवाजा,
निश्चय ही स्वतः खुल जाता ।
आओ मिलकर गुरु – महिमा की,
खुल कर करें हम बखान ।
जन्म हमारा सुधर जाए ,
उनकी कीर्ति का हम करें गुणगान ।
आशीष अम्बर
( विशिष्ट शिक्षक)
उत्क्रमित मध्य विद्यालय धनुषी
प्रखंड – केवटी
जिला – दरभंगा
बिहार ।

