पद्यपंकज Bhakti,sandeshparak गुरु वंदना-कार्तिक कुमार

गुरु वंदना-कार्तिक कुमार


Kartik Kumar

गुरु हैं ज्ञान के उजियारे,

जीवन के सच्चे पथ-दर्शक प्यारे।

अज्ञान का तम जो हर लेते,

सत्य का दीपक घर-घर देते।

गुरु का ऋण न कोई चुका पाए,

उनकी कृपा जीवन महकाए।

संस्कारों का अमृत बरसाएँ,

सदाचार की राह दिखाएँ।

गुरु ही जीवन की पहचान,

गुरु से बढ़ता देश का मान।

शिक्षा, सेवा, प्रेम का सार,

गुरु हैं जग के सच्चे आधार।

गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व,

भर दे मन में श्रद्धा और गर्व।

आओ सब मिल शीश नवाएँ,

गुरु चरणों में पुष्प चढ़ाएँ।

गुरु कृपा से हो कल्याण,

ज्ञान बने जीवन की शान।

गुरु वंदन, गुरु का मान,

यही है भारत की पहचान।

प्रस्तुति : कार्तिक कुमार

मध्य विद्यालय कटरमाला, गोरौल, वैशाली (बिहार)

मोबाइल : 7004318121

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