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हिन्द देश के वासी हैं हम, हिंदी अपनी भाषा।
है हिंदी अपनी भाषा, तुम करना गौर जरा सा,
कुछ करना गौर जरा सा, है हिंदी अपनी भाषा।।
सरल इतनी कि शब्दों से बयां सब अर्थ हो जाए,
सुलभ इतनी किसी भाषा से मिल नव अर्थ ले आए।
मौन साहित्य मन की भावना में मौज भर देती,
कविताएं हृदयपट पर खुमारी बन के छा जाए।
जितना सीखो उतनी बढ़ती जाती है जिज्ञासा,
हिन्द देश के वासी हैं हम, हिंदी अपनी भाषा।।
एक बात को सौ ढंग से शृंगारित कर बतलाना,
कड़वी बातों में भी भावों के एहसास मिलाना।
और कभी अपने दामन में व्यंग्य के रंग समेटे,
हिंदी आसाँ कर देती है हंसना और हंसाना।
कवियों को मिलती सच्ची अनुभूति की परिभाषा
हिन्द देश के वासी हैं हम, हिंदी अपनी भाषा।।
संतोषी कुमारी
विद्यालय अध्यापिका
उत्क्रमित मध्य विद्यालय,
जगवन कटैया, बिस्फी, मधुबनी

