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संयुत छंद (वार्णिक मापनी-112 121 121 2)
गणावली-सलगा जभान जभान गा
हर साँस थी जिससे जुड़ी।
मुख मोड़ वो मुझसे उड़ी।।
गलती हुई मुझसे यही।
सच बात को सच जो कही।।
किस बात से तुम हो खफा।
इतना हमें अब दो बता।।
चलना नहीं यदि साथ तो।
अब भूल जा सब बात को।।
रहना सदा अब प्यार से।
लग के गले दिलदार से।।
करना नहीं शिकवा कभी।
रहना सदा सुख से सभी।।
करना सदा तुम बंदगी।
अनमोल है यह जिंदगी।।
तज के सभी अभिमान को।
सुमिरौ सदा प्रभु नाम को।।
कुमकुम कुमारी 'काव्याकृति'
प्रभारी प्रधानाध्यापक
मध्य विद्यालय बाँक, जमालपुर
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