बहुत प्रबल होता है सखे ये, मोह का नाज़ुक बंधन।
इसमें बंधे चले जाते सब , धनी हो चाहे निर्धन।।
राजा हो या रंक ऋषि- मुनि , अज्ञानी हो या ज्ञानी।
त्रिदेव, सहित नारद से जुड़ी हैं ,मोह की सत्य कहानी।।
मोह के बंधन में बंधकर सब, दुख को गले लगाया।
माया के अधीन हो जग में, रोया और पछताया।।
मोह के बंधन में मायावश, दुख लगता है फूल ।
भ्रमर रूप यह बांवरा मन, मायापति को जाता भूल।।
पिता-पुत्र,भाई- बहन सहोदर,पत्नी प्रेयसी महतारी।
इनके मोह में नर्क गये कई, कई बने स्वर्ग अधिकारी।।
मोह महाविनाश का जड़ है, देती गीता जग को ज्ञान।
पुत्र मोह में पड़कर दशरथ जी,दिये थे अपनी जान।।
मोह सभी रोगों का जड़ है ,जानते हैं सब लोग।
हँसी- खुशी इनमें पड़कर बस, भोगते विविध हैं भोग।।
मोह बंधन से नहीं अछूता, कहती ‘मनु’ संसार।
मोह बंधन से छूटोगे जब, पाओगे करतार।।
स्वरचित एवं मौलिक
मनु कुमारी, विशिष्ट शिक्षिका, प्राथमिक विद्यालय दीपनगर बिचारी, राघोपुर
सुपौल,

