पद्यपंकज Uncategorized वटवृक्ष की पत्नी कहती है नीतू रानी

वटवृक्ष की पत्नी कहती है नीतू रानी



विषय- वटसावित्री त्योहार
शीर्षक -वटवृक्ष की पत्नी कहती है।

वटवृक्ष की पत्नी कहती है
क्या यही है वटसावित्री का त्योहार,
जिस त्योहार में मनुष्य महिलाएँ करती हैं हमारे वृक्ष पति से प्यार।

बार -बार महिलाएँ करती आ रही यही अपराध,
जिसकी वो खुद से स्वयं हैं
जिम्मेवार और सजावार।

देखिए वटवृक्ष भी है किसी वटवृक्षिका का पति
वो भी है अपने पति की प्यारी सती,

वटवृक्ष को भी है अपना परिवार
वो भी मनाते पर्व त्योहार,
उनका भी होता जन्म- मरण
वो भी करता संतान उत्पन्न।

फिर भी लोग ये क्यूँ नहीं समझते,
मेरे पति को अपना पति समझते।

क्या मनुष्य जाति के लिए यही है उचित विचार,
लगेगा उनको पतिव्रता का पाप।

मांँ सावित्री नहीं गई वटवृक्ष के पास,
सदैव रही अपने पति के आस-पास।

अपने सतीव्रता का‌ सावित्री ने दी प्रमाण ,
और यमराज से लौटाकर लाई अपने पति का प्राण।

उसी दिन से मनाया जाता
वटसावित्री का त्योहार,
जो महिलाओं के लिए बन गया एक उपहार।

यदि महिलाएंँ अपने पति को छोड़कर आती हैं मेरे पति के पास,
ईश्वर उसको कभी माफ न करेंगे
देंगे उस महिला को घोर नरक में वास।

मैं हूँ अपने पति वटवृक्ष की पत्नी
खूब करती हूँ अपने पति से प्यार,
उनके लिए आज मैं भी कर रही हूँ नियम धरम से वटसावित्री त्योहार।

मैं भी बाजार से खरीद लाई पाँच फल और बाँस का पंखा ,
पूजा करुंँगी तन और मन से
पहनके चूड़ी और शंखा।

आप लोग भी कीजिए
पवित्र मन से वटसावित्री त्योहार,
धागा से पति को बाँधिए,
गला मीलिए उनसे पाँच बार।

अपने पति को छोड़कर नही आइए मेरे वृक्ष पति पास,
उनकी हीं पूजा से आपका
अचल रहेगा अहिबात।

यही है पतिव्रता स्त्री का आचरण यही है पूजा- पाठ,
इसी से बढ़ेगी पति की आयु
इसी से बढ़ेगा सुहाग।

अगर नीरानी से कोई भूल हुई
क्षमा करेंगे आप,
सब कोई मुझे आशीष दीजिए
न दीजिए मुझे कोई श्राप।

नीतू रानी, विशिष्ट शिक्षिका
स्कूल -म० वि० रहमत नगर सदर मुख्यालय पूर्णियाँ बिहार।

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