Nitu Rani

कोजगराक गीत नीतू रानी “निवेदिता”कोजगराक गीत नीतू रानी “निवेदिता”

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लक्ष्मी पूजा एवं कोजगरा की हार्दिक शुभकामनाएँ आप सबों को। विषय-गीत शीर्षक-कोजगरा। तर्ज-सावन का महीना पवन करे शोर। कोजगराक गीत[...]

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चाचा का कोजगरा – अवधेश कुमारचाचा का कोजगरा – अवधेश कुमार

0 Comments 8:11 am

चाचा का कोजगरा : –शरद पूर्णिमा की चाँदनी छम-छम बरसे,आँगन हो उजियार,खुशियों की झिलमिल करती, उल्लास भरे त्यौहार।माँ के थाल[...]

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Ram Kishor Pathak

मैं कैसे हार मान लूंँ – राम किशोर पाठकमैं कैसे हार मान लूंँ – राम किशोर पाठक

0 Comments 11:22 am

मैं कैसे हार मान लूँ- गीत (अंतरराष्ट्रीय शिक्षक दिवस पर ) आओ नयी पहचान लूँमैं कैसे हार मान लूँ। शिक्षक[...]

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एक ही ईश्वर की संतान – जैनेन्द्र प्रसाद रविएक ही ईश्वर की संतान – जैनेन्द्र प्रसाद रवि

0 Comments 11:18 am

(मनहरण घनाक्षरी छंद में) भाग-१सभी लोग खाते अन्न,एक जैसा होता तन,एक ही तो जल पीते, हिंदू मुसलमां हैं। सभी स्वांस[...]

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बातों के ज़ख्म घर कर जाते हैं- मनु कुमारीबातों के ज़ख्म घर कर जाते हैं- मनु कुमारी

0 Comments 7:36 pm

बातों के ज़ख्म घर कर जाते हैं चोट के ज़ख्म तो भर जाते हैं, बातों के ज़ख्म घर कर जाते[...]

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Ram Kishor Pathak

उत्पाती वर्षा – राम किशोर पाठकउत्पाती वर्षा – राम किशोर पाठक

0 Comments 2:51 pm

उत्पाती वर्षा वर्षा रानी क्रुद्ध हो, करती है उत्पात।इंद्र साथ भी दे रहे, कर भीषण वज्रपात।। बाहर खतरा है घना,[...]

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Ram Kishor Pathak

गणपति वंदना – राम किशोर पाठकगणपति वंदना – राम किशोर पाठक

0 Comments 10:08 am

महामंगला छंद हे गणपति गजवदन, तुम्हें नवाऊँ शीश। देव पूज्य तुम प्रथम, कृपा करो जगदीश।। गिरिजा नंदन नमन, तुमको बारंबार।[...]

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बाल प्रेरक व्यक्तित्व – राष्ट्रपिता गांधी जी एवं शास्त्री जी – अवधेश कुमारबाल प्रेरक व्यक्तित्व – राष्ट्रपिता गांधी जी एवं शास्त्री जी – अवधेश कुमार

0 Comments 11:07 am

बाल प्रेरक व्यक्तित्व : राष्ट्रपिता गाँधी जी और शास्त्री जीचरखा वाले बापू प्यारे,सत्य-अहिंसा की राह दिखाए।सादगी जिसने सिखलाई,सबको प्रेम-भाव अपनाए।[...]

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देवदूत – जैनेन्द्र प्रसाद रविदेवदूत – जैनेन्द्र प्रसाद रवि

0 Comments 11:02 am

देवदूत(मनहरण घनाक्षरी छंद में)††††भाग-१देवदूत बनकर,लिया जब अवतार,वन गिरी जमीं संग, झूमा था गगन है। खुद जो गरल पीया,दूसरों के लिए[...]

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रघुनंदन का है शिकार- रामपाल प्रसाद सिंह अनजानरघुनंदन का है शिकार- रामपाल प्रसाद सिंह अनजान

0 Comments 10:59 am

पद्धरी छंदसम -मात्रिक छंद, 16 मात्राएँआरंभ द्विकल से,पदांत Slअनिवार्य रघुनंदन का है शिकार। हर दिशा निशा लो गईं जाग।सबके होंठों[...]

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