गुरुद्वार-मैं जाऊंगी बार-बार – नीतू रानीगुरुद्वार-मैं जाऊंगी बार-बार – नीतू रानी

0 Comments 10:56 am

विषय -गुरुद्वार।शीर्षक -मैं जाउँगी बार -बार। मेरा सबकुछ है गुरुद्वार,मैं जाउंँगी बार- बार। मेरे माता-पिता गुरु हैंमेरे बंधु सखा गुरु,मेरे[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

दशहरा -दोहावली रामकिशोर पाठकदशहरा -दोहावली रामकिशोर पाठक

0 Comments 10:51 am

दशहरा- दोहावली उस रावण को मारिए, जिसका मन पर राज। सफल तभी यह दशहरा, कह पाएँगे आज।।०१।। करते पुतला का[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Ram Kishor Pathak

अनुपम गाँधी-शास्त्री- राम किशोर पाठकअनुपम गाँधी-शास्त्री- राम किशोर पाठक

0 Comments 12:17 pm

गाँधी शास्त्री थें भारत के लाल। जन्में दोनों सुंदर देश विशाल।। अपने कर्मो से हरपल विख्यात। धन्य हुई दोनों से[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

आलू रे आलू तेरा रंग कैसा – नीतू रानीआलू रे आलू तेरा रंग कैसा – नीतू रानी

0 Comments 10:31 pm

आलू रे आलू तेरा रंग कैसाजिस सब्जी में मिला दूँ लगे उस जैसाआलू रे आलू ———-२। आलू की चटनी बहुत[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

बहती गंगा-सी पुण्यधार रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’बहती गंगा-सी पुण्यधार रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’

0 Comments 6:38 pm

पद्धरी छंद सम-मात्रिक छंद, 16 मात्राएँ आरंभ द्विकल से, पदांत Sl अनिवार्य।   मां सिद्धिदायिनी दिव्य भाल। दिखते हैं सागर[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Ram Kishor Pathak

रावणी गुण- राम किशोर पाठकरावणी गुण- राम किशोर पाठक

0 Comments 5:22 pm

हत्या चोरी आचार यौन । झूठी वाणी रहना न मौन।। भाषा विभक्त-कारी कठोर। धारे लालच लोभ घनघोर।। कारण प्रभाव देता[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

भारत की बेटियां – आशीष अंबरभारत की बेटियां – आशीष अंबर

0 Comments 3:55 pm

सारे संसार में नाम कमाया है ,अपनी प्रतिभा का जादू बिखराया है।देश हो या विदेश हर जगह ,भारत की बेटियां[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

मां भवानी – रामपाल प्रसाद सिंह अनजानमां भवानी – रामपाल प्रसाद सिंह अनजान

0 Comments 3:52 pm

पद्धरी छंदसम -मात्रिक छंद, 16 मात्राएँआरंभ द्विकल से,पदांत Slअनिवार्य। प्रकट सिद्धिदात्री दिव्य भाल।आभासी अतिविकट विकराल।।पूर्ण कर अभ्यागत के आस।भर दें[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें

सामाजिक समानता – जैनेन्द्र प्रसाद रविसामाजिक समानता – जैनेन्द्र प्रसाद रवि

0 Comments 3:48 pm

मनहरण घनाक्षरी छंद सैकड़ो हैं धर्म-पंथ,जिसका नहीं है अंत,दुनिया में गरीबों की, होती नहीं जात है। दिन भर कमाते हैं,जो[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Ram Kishor Pathak

अपने सपने – राम किशोर पाठकअपने सपने – राम किशोर पाठक

0 Comments 3:43 pm

अपने सपने- मणिमाल वार्णिक छंद कहता यहाँ हर शख्स है, करता यहाँ पर कौन।जब भी उठी यह बात तो, रहते[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें