जहाँ परिवेश है सुंदर, वही महिमा बढ़ाते हैं। पुराणों और वेदों से विद्या की लौ जलाते हैं। हमारा देश है प्यारा, धरा पर मान पाते हैं। अतुल है राष्ट्र की…
बसंत पंचमी
धनाक्षरी छंद में बसंत पंचमी पर्व,खुशी-खुशी मनाते हैं,सभी भक्त माॅं शारदे का आशीष पाते हैं। हर वर्ष यह पर्व,माघ पंचमी को आता,हम सभी पूरी निष्ठा, श्रद्धा से मनाते हैं। हॅंस…
आत्मविश्वास से भरे डगर में -अमरनाथ त्रिवेदी
आत्मविश्वास से भरे डगर में , न मन, प्राण , वचन से पीछे जाना । हम सबके दिल के स्नेह हो प्यारे , भविष्य में अपनी पहचान बनाना । मन हर्षित दिल अभिलषित है मेरा , तू अभी से सँभलते जाओ । स्नेहसिक्त करूँ आज तुझे मैं…
टीचर्स ऑफ बिहार : नवचेतना का उद्घोष-मनु कुमारी
जब शिक्षा को मिला नव संबल, जब शिक्षक को पहचान मिली, बीस जनवरी का वह पावन दिन, नव इतिहास की आधारशिला मिली। विचार बने दीप, श्रम बनी लौ, प्रतिभा को…
टीचर्स ऑफ बिहार हमारा-एम० एस० हुसैन कैमूरी
आज है , टीओबी का स्थापना दिवस आईए हम सब मिलकर इसको मनाएं इसी से होती है हमारी रचनाएं प्रकाशित जन – जन तक इस बात को पहुंचाएं कौन करेगा…
ऋतुराज बसंत- रत्ना प्रिया
प्रकृति यौवन का रूप धार, करती नित्य-नूतन श्रृंगार, सौंदर्य शिखाओं में अनंत, चहुँ ओर खिला यह दिग-दिगंत, कण-कण में उल्लास छा गया । ऋतुराज बसंत है आ गया । पीत-वर्णी…
हे भारत -गिरीन्द्र मोहन झा
हे भारत ! रामायण की मर्यादा, नीति, कर्त्तव्यपरायणता तुममें, है तुझमें वेद, उपनिषद, भगवद गीता का असीम ज्ञान, विदुरनीति, नीतिशतक, कौटिल्य की नीति-अर्थशास्त्र तुममें, कई महापुरुष हैं तेरे सपूत, है…
माता वाणी से विनय- रामकिशोर पाठक
माता वाणी से विनय- विधाता छंद गीत पुकारूँ मैं तुम्हें माता, जरा मुझपर तरस खाओ। हरो अज्ञानता मेरी, सहज कुछ ज्ञान दे जाओ।। जरा वीणा बजा दो माँ, सभी सुर…
प्रकट हो माता भवानी रामपाल प्रसाद सिंह
कुंडलिया प्रकट हो मात भवानी। (दुर्गा/पार्वती) मात भवानी प्रेरणा,शक्ति पुंज आधार। धरा अकारण मानती,तेरा ही उपकार।। तेरा ही उपकार,सघन हरियाली छाई। संकट में संसार,आप ही सम्मुख आई।। कहते हैं”अनजान”,अमिट है…
कछुआ -नीतू रानी
विषय -बाल कविता। शीर्षक -कछुआ , बिल्ली, घोड़ा जिराफ। मैंने बनाई चार्ट पेपर से कछुआ, बिल्ली, घोड़ा ,जिराफ, देखने में लगते हैं ओरिजनल और दिखते सुंदर और साफ। बिल्ली घर…