छंदों को भी गढ़ना चाहूँ- गीत गीत गजल मैं पढ़ना चाहूँ।छंदों को भी गढ़ना चाहूँ।। पर मुझको कुछ ज्ञान नहीं है।शब्द शक्ति का भान नहीं है।।कविता पथ पर बढ़ना चाहूँ।छंदों…
आस में(ग़ज़ल)- राम किशोर पाठक
आस में – गजल क्या रखा है किसी की हर आस में। सफलता होनी चाहिए पास में।। बेशक मुझे दुनिया नहीं जानती। किसी के लिए मैं भी हूँ खास में।।…
ये तो प्यारे बच्चे हैं – आशीष अंबर
ये तो प्यारे बच्चें है,मन के बड़े ही सच्चें है । ये बच्चें है देश की शान,चाचा नेहरु का यही अरमान । फूलों का उनमें है रंग,तितलियों सा है भरा…
गुणगुणी धूप – जैनेन्द्र प्रसाद रवि
गुण गुणी धूपमनहरण घनाक्षरी छंद सूरज निकलने कारहता है इंतजार,सुबह की धूप हमें, लगती तो प्यारी है। दूर तक दिखती हैमखमली बिछी हुई,घास पर ओस बूंदें, मोती जैसी न्यारी है।…
शिक्षा का दीप…राम किशोर पाठक
शिक्षा का दीप जलाना है- गीत अब सबको राह दिखाना है। शिक्षा का दीप जलाना है।। चाहत सबकी नभ को छूना । शंकाओं का हल हो दूना।। अनपढ़ का रोग…
प्रकाश..राम किशोर पाठक
प्रकाश- अनंद छंद गीत (मात्रिक १२-१२-१२-१२, १२-१२-१२) सुमन यहाँ विछा रहें, पथिक चलो अभी।प्रदीप हम जला रहे, उदास क्यों सभी।। प्रयास लक्ष्य साधता, कदम बढ़ा जरा।सफल वही बना सदा, कभी…
सर्दी- कहमुकरी- राम किशोर पाठक
सर्दी – कहमुकरी स्पर्श सदा कंपित है करती। रोम-रोम में सिहरन भरती।। जैसे वह हमसे बेदर्दी। क्या सखि? साजन! न सखी! सर्दी।।०१।। कभी डरूँ तो छुप मैं जाऊँ। दिन-भर जमकर…
बलहीनन का बस पीड़ हरो-रामपाल प्रसाद सिंहअनजान
हम जान रहे कर क्या सकते, तुम तो न मुझे इनकार करो। शुभ कर्म किए शुभ धर्म किए,मम श्वेत मकान मत कार करो।। चरणों पर मैं नत हूॅं कब से,प्रभु…
तोटक छंद वर्णिक-रामपाल प्रसाद सिंहअनजान
तोटक छंद वर्णिक(112) 112-112-112-112 दो चरण सम तुकांत दिन में दिखते मन के सपने। हिय में रहने लगते अपने।। रचने लगते शुभ भाव यहाॅं। भरने लगते मन घाव यहाॅं।। सजने…
भोलेनाथ हमारे – राम किशोर पाठक
भोलेनाथ हमारे । तेरे भक्त पुकारे ।। आएँ हैं सब द्वारे । तू ही कष्ट उबारे।। आओ हे त्रिपुरारी। नैना नीर हमारी।। हे भोले अघहारी। शोभा सुंदर न्यारी।। नैनों को…