Amarnath Trivedi

खुद ही राह बनाओ – अमरनाथ त्रिवेदीखुद ही राह बनाओ – अमरनाथ त्रिवेदी

0 Comments 7:51 am

जमाना    सुनता      सबकी   बातें , सोच  समझ   करता  निज    मन  की । बनेगी   पहचान  तो   तभी   उसे   ही  ,   निकलेगी बात  ज़ब  उसके  दिल  की । कदम – कदम   पर     मिलती    नसीहत   मिलते[...]

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Ram Kishore Pathak

हिल-मिल जाइए-राम किशोर पाठक हिल-मिल जाइए-राम किशोर पाठक 

0 Comments 7:23 pm

आज हुआ है तमस घनेरा, दीप जलाइए। फैलाकर उजियारा जग का, मित्र कहाइए।। स्वार्थ भावना को तजने से, खोते कुछ[...]

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Ram Kishore Pathak

आजमाने के लिए-राम किशोर पाठक आजमाने के लिए-राम किशोर पाठक 

0 Comments 6:44 pm

वक्त लोगों को बहुत है आजमाने के लिए। दाव सारे जानते हैं जो गिराने के लिए।। वक्त ने ऐसा सितम[...]

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Jainendra

प्रेम पुजारी -जैनेंद्र प्रसाद रविप्रेम पुजारी -जैनेंद्र प्रसाद रवि

0 Comments 12:45 pm

प्रभाती पुष्प प्रेम पुजारी सभी भक्त प्रेमियों की- करुण पुकार सुन, दुख देख द्रवित हो, जाता है ये कन्हैया। यमुना[...]

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Ram Kishore Pathak

समृद्ध भारत -रामकिशोर पाठकसमृद्ध भारत -रामकिशोर पाठक

0 Comments 12:42 pm

समृद्ध भारत – दोहा छंद गीत है समृद्ध भारत सदा, बौद्धिकता में खास। हमें गर्व होता रहा, है पावन इतिहास।।[...]

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S K punam

ईश्वर से जुड़े तार -एस. के.पूनमईश्वर से जुड़े तार -एस. के.पूनम

0 Comments 12:39 pm

🙏ऊँ कृष्णाय नमः🙏 रूपघनाक्षरी छंद। (ईश्वर से जुड़े तार) उत्कीर्णन पीत वर्ण, रश्मियों का शृंगार है, दिशा प्राची रवि खड़े,करते[...]

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जाड़े की धूप.. मो आसिफ़ इक़बालजाड़े की धूप.. मो आसिफ़ इक़बाल

0 Comments 9:09 am

दुनिया के सारे इंसान बच्चे बूढ़े और जवान देखो कितनी ठंड पड़ी ठिठुर ठिठुर सब हैं परेशान।। अब तो एक[...]

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Ram Kishore Pathak

राज को न खोलिए..रामकिशोर पाठकराज को न खोलिए..रामकिशोर पाठक

0 Comments 7:02 pm

राज को न खोलिए २१२-१२१-२ राज को न खोलिए।और से न बोलिए।। प्रीति नैन में बसी।आप खास हो लिए।। शब्द-शब्द[...]

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आपस में प्यार हो.. जैनेंद्र प्रसाद रविआपस में प्यार हो.. जैनेंद्र प्रसाद रवि

0 Comments 6:58 pm

*आपस में प्यार हो*(मनहरण घनाक्षरी छंद)**********************कोई कहे लाख बुरा- करता   बुराई   नहीं, *अवगुण गुण बन-जाए सद्विचार हो*। यदि हो अभिन्न[...]

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Ram Kishore Pathak

बम शिव कहके- मधुमति छंद वर्णिक – राम किशोर पाठकबम शिव कहके- मधुमति छंद वर्णिक – राम किशोर पाठक

0 Comments 9:54 pm

बम शिव कहके- मधुमति छंद वर्णिक – राम किशोर पाठक १११-१११-२ उपवन महके। खर खग चहके।। तन-मन बहके। बम शिव[...]

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