पद्यपंकज Uncategorized प्रकृति प्रहरी-पूनम कुमारी

प्रकृति प्रहरी-पूनम कुमारी



जब धरती की साँसें घुटती हैं,

जब नदियाँ रोती हैं,

जब जंगल की हरियाली

धीरे-धीरे खोती है,

तब कौन बनेगा उसका प्रहरी?

आओ, हम बनें—प्रकृति प्रहरी।

वृक्ष नहीं केवल पेड़ हैं,

ये जीवन के आधार हैं,

इनकी छाया में पलते

कितने सपने, कितने संसार हैं।

एक वृक्ष जब धरती पर रोपें,

सौ जीवन मुस्काएँ—

आओ मिलकर हर आँगन में

हरियाली के दीप जलाएँ।

नदियों को निर्मल रहने दें,

जल की बूँद न व्यर्थ बहाएँ।

पर्वत, वन और खुले गगन को

अपने मन से अपनाएँ।

धुआँ न भरें हवाओं में,

मिट्टी को न विष से ढकें,

आज प्रकृति को यदि बचाएँ,

कल अपने बच्चों को बचाएँ।

पंछी फिर निर्भय गीत सुनाएँ,

फूलों से महके हर डाली,

धरती माँ के माथे पर हो

फिर से हरियाली की लाली।

हम बदलेंगे अपनी आदत,

हम बदलेंगे अपनी राह—

प्रकृति बचेगी, जीवन बचेगा,

यही हमारा सच्चा संकल्प और चाह।

न हम केवल बातें करेंगे,

न केवल नारे दोहराएँगे;

एक-एक कदम बढ़ाकर हम

धरती का ऋण चुकाएँगे।

आओ आज शपथ यह लें—

वृक्ष बचाएँगे, जल बचाएँगे,

धरती माँ का मान बढ़ाएँगे।

जब तक जीवन, तब तक प्रहरी—

हम सब होंगे प्रकृति प्रहरी।

पूनम कुमारी

उच्च माध्यमिक विद्यालय, करजा

शाहपुर प्रखंड, जिला भोजपुर

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