पद्यपंकज sandeshparak,Shakshanik फटकार से संस्कार – उमेश कुमार सिन्हा ‘ निर्देशक ‘

फटकार से संस्कार – उमेश कुमार सिन्हा ‘ निर्देशक ‘



जो डाँट पड़ी, वह मस्तिष्क में आट गई,

इसे अपने दिल में न लगाओ।

मूर्तिकार के पत्थर से पूछो—

क्या उसे चोट पहुँचती है?

चोट से वे पूज्य हो जाते हैं,

क्या वे चोट को याद रखते हैं?

जो याद रखे, वे बिगड़ गए, टूट गए।

क्या मूर्तिकार इसका अफसोस करता है?

चोट खाए, डाँट खाए—

वे बन गए, मंदिर में पूजे गए।

ऐसे रह गए जो गम किए,

डाँट की परवाह किए—

वे दर-दर के बिखर गए।

पूछो उनसे—

क्या पाए, क्या खोए?

बनने वाला कर्म करता है,

डाँट-फटकार का गम नहीं करता।

अपनी सच्ची कर्तव्यनिष्ठा से,

रिश्तों की सुगंध को अपने नेक कर्मों से

बाँट खोजता है।

स्वरचित और मौलिक रचना:-

रचनाकार:-

उमेश कुमार सिन्हा निर्देशक ‘

डिसेंट एकेडमी वाया स्कूल रघुनाथपुर 

तुलसीपथ लालापुल रघुनाथपुर 

अंचल – ब्रह्मपुर

जिला – बक्सर

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