ऊँ कृष्णाय नमः
विधाता छंद
विषय:-प्रेम – एस.के.पूनम
करें हम प्रेम जीवन में,
सुखद परिणाम हम पायें।
मिटा कर क्लेश लोगों का,
भँवर को पार कर जायें।
गहन हैं प्रेम प्रभु अपना,
चुने हैं पंथ सुखदाई ।
दिया है जन्म जीवों को,
अलौकिक दीप्ति है पाई ।
(2)
यहाँ शुभ रीत सीखी है,
रखेंगे नेह अपनों से।
बना प्रतिमान दुनिया का,
रहें हम दूर सपनों से।
दया पाकर विधाता से,
व्यथाओं की कड़ी टूटी।
जुड़े रिश्ते परायों से,
प्रणय की ऊर्मि भी फूटी।
(3)
हमारा भाव है सच्चा,
भँवर से खींच लाया है।
पिता-माता तुम्हीं दाता,
मुझे जीना सिखाया है।
किया है प्रेम गुरुवर से,
मिटा अज्ञान जीवन का।
मिला है ज्ञान संतों से,
करें गुणगान कीर्तन का।
(4)
न तोड़ें पुष्प बगिया से,
मनोहर रूप है उसका।
खिली है धूप आँगन में,
मिला है प्यार जो उनका।
मिटाना द्वेष .को भाई,
यही दायित्व है तेरा।
वतन से नेह है मुझको,
निछावर प्राण है मेरा।
एस.के.पूनम।
सेवानिवृत्त शिक्षक,फुलवारी शरीफ,पटना।
