राधा-कृष्ण की होली- राम किशोर पाठक

Ram Kishore Pathak

मोहन रंग लिए कर में छुपते छुपते जब दौड़ लगाए।

धूल सभी अति हर्षित होकर माधव के तन से लिपटाए।।

लाल गुलाल अबीर नहीं मकरंद सजा तन को चमकाए।

दर्श हुआ वृषभान सुता जब तो चुपके-चुपके धर लाए।।०१।।

मोहन की छवि सुंदर शोभित देख रही वृषभान दुलारी।

श्याम छुपे तृण ओट लिए निज रूप धरे मोहक बनवारी।।

रंग भरी छिपती-छिपती वृषभान सुता निज ले पिचकारी।

पास गई पद चाप गई नव रंग वहीं मुरलीधर मारी।।०२।।

रचनाकार:- राम किशोर पाठक

प्रधान शिक्षक 

प्राथमिक विद्यालय कालीगंज उत्तर टोला, बिहटा, पटना, बिहार।

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