पुस्तक- गीता छंद गीत
२२१२-२२१२, २२१२-२२१
पुस्तक सदा वरती हमें, शुभ ज्ञान का आधार।
है मित्र सच्चा मान लो, सपना करे साकार।।
अच्छे बुरे के भेद का, देता सहज ही ज्ञान।
दोस्ती करो इससे अगर, होता नहीं नुकसान।।
करता सतत हर-पल सहज, अज्ञानता पर वार।
पुस्तक सदा वरती हमें, शुभ ज्ञान का आधार।।०१।।
हमको मिलाती सत्य से, जिससे गहे सम्मान।
वह बात बतलाती सदा, जो बन सके वरदान।।
है दूर फिर क्यों हो रहा, इससे यहाँ संसार।
पुस्तक सदा वरती हमें, शुभ ज्ञान का आधार।।०२।।
युग आज बदला है मगर, बनिए नहीं नादान।
पढ़िए इसे अब शौक से, यह दे बदल पहचान।।
अक्षर सभी मोती लगे, गोता अगर लें मार।
पुस्तक सदा वरती हमें, शुभ ज्ञान का आधार।।०३।।
गीतकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
सियारामपुर, पालीगंज, पटना, बिहार।
संपर्क – ९८३५२३२९७८

